बांका:29 दिसंबर को चांदन थाने की पुलिस पर पत्थर चलाने के मामले में 11 नामजद और कुछ अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज करने से आक्रोशित करीब 200 से अधिक महिला, पुरुष आदिवासी ने ढोल नगाड़े और अपने पारंपरिक हथियार के साथ थाने का कई घंटे तक घेराव किया। बाद में थानाध्यक्ष द्वारा अज्ञात में किसी का नाम नही जोड़ने और एक मृतक सहित एक विधवा महिला का नाम हटाने के आश्वासन के बाद घेराब को आदिवासियों ने समाप्त किया। घटना की शुरुआत 28 दिसंबर को उसे वक्त हुई जब उसी गांव के बगल में एक पोखर से 1202 बोतल विदेशी शराब बरामद किया गया था। उसी शराब की आशंका में पुलिस ने चांदन पंचायत के बाबुकुरा गांव में छापामारी के लिए गयी थी। जहां आदिवासी महिलाओं और पुरुषों ने पुलिस पर पत्थर बाजी शुरू कर दी और एक होमगार्ड जवान कौशल यादव से राइफल छीलने का प्रयास किया गया। साथ ही साथ सरकारी वाहन चालक को भी बंधक बना लिया था। स्थिति काफी खराब होने के बाद रात को ही एसडीपीओ बेलहर,राज किशोर प्रसाद के आदेश पर सुईया,कटोरिया,आनंदपुर, के थानाध्यक्ष भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ गये थे।बाद में काफी मशक्कत के बाद प्रमुख रवीश कुमार और मुखिया अनिल कुमार के द्वारा समझाने बुझाने के बाद उन लोगों को वहां से छोड़ा गया। दूसरे दिन सअनि रविंद्र कुमार द्वारा सरकारी काम में बाधा सहित अन्य धाराओं में सूचक बनकर मामला दर्ज कराया गया जिसमें 11 नामजद और करीब एक दर्जन अज्ञात को नामित किया गया। जिसमें एक ऐसे व्यक्ति का भी नाम शामिल था जिसकी मृत्यु महीना पूर्व हो चुकी है। इसी घटना से आक्रोशित आदिवासियों ने अगल-बगल के कई गांव के आदिवासियों को इकट्ठा कर मंगलवार को थाने का घेराव कर दिया। मामला काफी गंभीर और तनावपूर्ण होने पर थानाध्यक्ष विष्णु देव कुमार द्वारा खुद मामले को शांत कराने का प्रयास किया गया। आदिवासियों द्वारा प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी भी की गई जबकि सभी महिलाओं के हाथ में कचिया, लाठी, तीर धनुष और पुरुष ढोल नगाड़े भी साथ-साथ ले कर आये थे। थानाध्यक्ष द्वारा उनकी मांग सुनने के बाद तत्काल उन्हें इसका आश्वासन दिया गया कि 11 नामजद में से एक मृतक और एक विधवा महिला का नाम हटा दिया जाएगा। इसके अलावे अज्ञात में किसी को भी नामित नहीं किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद आदिवासी समुदाय ने थाने का घेराव समाप्त कर दिया।
इस भीड़ का नेतृत्व कर रहे सोनेलाल का कहना है कि अगर थानाध्यक्ष अपने आश्वासन को पूरा नहीं करते है तो वे लोग कभी भी फिर से इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर सकते हैं। उनको पुलिस बेबजह परेशान नही करे।




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