प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर दी गई जानकारी

प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर दी गई जानकारी

चम्पारण नीति/ बेतिया(प.च.) निकरा परियोजना के तहत परसा एवं बगही बगम्बरपुर गांव में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन अंतर्गत गेहूं व सरसों को जीरो टिलेज तकनीक से बुवाई पर दिया गया जोर.
कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना के अंतर्गत चयनित ग्राम परसा में गेहूं एवं सरसों की फसलों के प्रक्षेत्र का भ्रमण किया गया। इस अवसर पर किसानों को शून्य जुताई तकनीक से गेहूं की उन्नत किस्म डी-बी-डब्ल्यू-187 तथा सरसों की उन्नत किस्म राजेन्द्र सुफलाम-1 की बुवाई के लाभों की जानकारी दी गई।
कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किसानों को बताया कि बदलते मौसम एवं जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में शून्य जुताई तकनीक किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि इस विधि से गेहूं एवं सरसों की बुवाई करने पर लगभग 20 प्रतिशत तक लागत में कमी, उत्पादन में वृद्धि तथा समय एवं ईंधन की बचत होती है।
उन्होंने किसानों को जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाने और परियोजना के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी और बताया कि शून्य जुताई तकनीक में खेत की पारंपरिक जुताई नहीं की जाती, जिससे मिट्टी की संरचना बनी रहती है, नमी का संरक्षण सहित मिट्टी के कटाव में कमी आती है। 
इस अवसर पर वरिष्ठ शोधकर्ता श्रीमती शांभवी की भी उपस्थिति रही। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान किसान मुकेश कुमार सिंह, रकटू दास, श्याम जय सिंह, श्रीकांत तिवारी एवं हरेंद्र ठाकुर सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे। किसानों ने शून्य जुताई तकनीक को अपने खेतों में अपनाने में रुचि व्यक्त की।
यह प्रक्षेत्र भ्रमण किसानों को कम लागत, अधिक उत्पादन एवं जलवायु-सहिष्णु खेती की दिशा में प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

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