एआई के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन जरुरी : दुबे

एआई के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन जरुरी : दुबे

चम्पारण नीति/बेतिया(प.च.) अशोक शास्त्री :-  एआई तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों और नैतिक जवाबदेही का संतुलन आवश्यक: आदित्य कुमार दुबे

 महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा 14–15 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में स्वतंत्र पत्रकार एवं शोधार्थी आदित्य कुमार दुबे ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कानूनी और नैतिक आयाम: शासन और सुरक्षा के संदर्भ में एक विश्लेषण” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।


अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 21वीं सदी तकनीकी क्रांति का दौर है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक अत्यंत प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा में एआई की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बैंकिंग के साथ-साथ अब साइबर हमलों की रोकथाम और आतंकवाद विरोधी अभियानों में डेटा विश्लेषण के लिए भी एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
अपने शोध पत्र में आदित्य कुमार दुबे ने एआई के उपयोग से जुड़ी कानूनी और नैतिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के विकास के साथ गोपनीयता (Privacy) का संकट और एल्गोरिथमिक पक्षपात (Algorithmic Bias) जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। यदि किसी एआई प्रणाली से कोई त्रुटि होती है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी तय करना वर्तमान समय की एक बड़ी चुनौती है।
तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ मॉडल का समर्थन करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण निर्णयों में मानवीय हस्तक्षेप अनिवार्य होना चाहिए, ताकि तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जा सके। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि एआई शासन व्यवस्था को अधिक सटीक और तेज बना सकता है, लेकिन इसके लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचे और नैतिक दिशानिर्देशों की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सोशल साइंसेज के डीन सुजीत कुमार चौधरी, राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार आर्या, सम्मेलन के संयोजक ओम प्रकाश गुप्ता तथा प्रेरणा भादुली सहित देश-विदेश से आए कई विद्वान और शोधार्थी उपस्थित रहे। संगोष्ठी के अंत में आदित्य कुमार दुबे को उनके शोध कार्य के लिए प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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