भूमि अधिग्रहण के विरोध में भाकपा (माले) का प्रदर्शन, ठाढ़ी के किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग



बगहा। भाकपा (माले) के नेतृत्व में मंगलवार को भूमि अधिकार और कथित बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में बगहा अनुमंडल कार्यालय पर मजदूरों एवं किसानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ठाढ़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों में किसानों की भूमि पर सरकारी कार्रवाई का विरोध करते हुए भूमि अधिकार सुनिश्चित करने तथा किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने आरोप लगाया कि ठाढ़ी में गंगबरार की करीब एक हजार एकड़ भूमि को पर्यटन परियोजनाओं के नाम पर कंपनियों को देने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां गरीब किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने पटना से वाल्मीकिनगर के लिए शुरू की गई हेलीकॉप्टर सेवा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह जनता के टैक्स के पैसे का अनुचित उपयोग है।
माले नेता परशुराम यादव ने कहा कि महुआवा, कटहरावा, नौरंगिया सहित कई क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा कथित भूमि अधिग्रहण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन अधिकार कानून तथा जोत-आबाद और वास-आवास संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने ठाढ़ी और नौरंगिया के उन निवासियों की बंदोबस्ती रद्द करने की प्रस्तावित कार्रवाई का भी विरोध किया, जिनकी भूमि का बंदोबस्त पूर्व में हो चुका है।
सभा को संबोधित करते हुए भिखारी प्रसाद ने सभी पर्चाधारी परिवारों को उनकी भूमि पर अधिकार दिलाने की मांग की। लालाबाबू सोनी ने रेलवे भूमि पर बसे कैलाशनगर तथा गंडक क्षेत्र के लोगों को आवासीय भूमि का पर्चा देने की मांग उठाई। वहीं रमजान मियां ने गांधी नगर, राजवाटिया, चखनी, खैरपोखर, पाकड़ और वनचहरी के गरीब परिवारों को वासभूमि का पर्चा उपलब्ध कराने की मांग की।
राजेंद्र प्रसाद ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं में अधिक काम उपलब्ध कराने तथा 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग की।
प्रदर्शन में कमलेश राम, पलट राय, सुमित्रा देवी, शुभवती देवी, राजवंती देवी, गौदी देवी, अंजली देवी, रमेश मुखिया, कलाम मुखिया, कलीम शैफी, नंदकिशोर राम, साधु राम, सरयुग राम, बांका राम सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और स्थानीय लोग शामिल रहे।
प्रदर्शन के अंत में भाकपा (माले) नेताओं ने प्रशासन से ठाढ़ी के किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, जोत-आबाद भूमि का कानूनी बंदोबस्त करने तथा भूमि अधिकार से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग की।

नोट: यह समाचार संबंधित संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। समाचार में लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष के दावे हैं। यदि संबंधित विभाग, प्रशासन या अन्य पक्ष अपना पक्ष या स्पष्टीकरण देना चाहते हैं, तो वे champaranniti@gmail.com पर ईमेल भेज सकते हैं। प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Post a Comment

आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...

Previous Post Next Post