बांका: नहाय खाय के साथ 4 दिनों तक चलने वाला छठ पर्व बुधवार से शुरू हो गया है। इस पर्व को मुख्य रूप से शुद्धता और पवित्रता का पर्व माना जाता है। कई पुरानी परंपराओं को आज भी इस उपयोग कर उसकी याद ताजा की जाती है। मुख्य रूप से गुरुवार को बनने वाला खरना का महाप्रसाद के लिए इतनी शुद्धता रखी जाती है कि व्रती खास कर ग्रामीण क्षेत्र के व्रती अपने घरों में ही चावल तैयार करते हैं। इसके लिए नहा धोकर धोकर को ओखली में या ढेकी में कूटकर चावल तैयार किया जाता है। और इसी का प्रसाद भगवान को खरना के दिन भोग लगाकर अन्य लोगो को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। आज के इस वैज्ञानिक युग में जब गांव गांव में आटा चक्की की भरमार है फिर भी ओखली की खोज इन दिनों निश्चित रूप से की जाती है। जिसमें व्रती और उसके परिवार के लोग स्नान कर धान का चावल तैयार करते हैं। उसी से तैयार किए गए खरना का प्रसाद भगवान को चढ़ाने के साथ-साथ गेहूं का आटा भी उसी प्रकार तैयार किया जाता है। जिसका ठेकुआ भी भगवान भाष्कर को चढ़ाया जाता है।
ओखली में तैयार चावल से बनता है खरना का प्रसाद
byआमोद कुमार दुबे
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