बांका (रजौन):बांका:रजौन प्रखंड के सिंहनान पंचायत के कैथा,भगवानपुर व गोपालपुर गांवों की सम्मलित सीमाओं पर अवस्थित कैथा पोखर से मिट्टी की खुदाई के दौरान में भगवान बुद्ध का आकर्षक तीन फीट 45 सेंटीमीटर यानी 45 इंच का शीलापट ,तीन अप्रैल को मिला था।जिला प्रशासन एवं सीआईडी विभाग द्वारा सरकार एवं पुरातत्व विभाग को सूचना देने के बाद रविवार को थाना परिसर में रखे गए शीलापट का बिहार विरासत विकास सचिवालय पटना से असिस्टेंट रिचर्स मैन डॉ अमित रंजन ने गहराई से पुरातत्व यंत्र विद्या के माध्यम से जांच पड़ताल करने के उपरांत कैथा पोखर पहुंचकर विस्तृत साक्ष्य उपलब्ध किए।बिहार विरासत विकास सचिवालय पटना से आए असिस्टेंट रिचर्स मैन डॉ अमित रंजन ने बताया कि कैथा पोखर से भग्नावशेष का इंट के दीवार का नमूना मिल गया है।उन्होंने बताया कि पोखर की खुदाई के क्रम में स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा जब्त किए गए भगवान बुद्ध का शीलापट नहीं है।उन्होंने बताया घर के दरवाजे के प्रवेश द्वार का स्तंभ हैं व उक्त स्तंभ पर बुद्ध की प्रतिमा अंकित है।वहीं, कार्यपालक निदेशक डॉ विजय कुमार चौधरी ने बताया कि प्राप्त स्तंभ पर अंकित प्रतिमा का स्टडी व्यापक पैमाने पर की जा रही है।स्टडी कार्य पूर्ण होने के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचते हुए पर्दाफाश किया जाएगा।
कैथा पोखर से तीन अप्रैल को जेसीबी मशीन द्वारा मिट्टी खुदाई के क्रम में गौतम बुद्ध की प्रतिमा मिली है।यह प्रतिमा काले पत्थर पर उकेरी गई है।इस बड़ी प्रतिमा के बगल में स्वागत करती महिला गौतम बुद्ध की शिष्या बिसाखा मालूम पड़ती है।इन दो प्रतिमाओं के ऊपर पांच व प्रतिमाएं हैं,जो गौतम बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में अंकित हैं।उक्त पोखर से प्राचीन भग्नावशेष,ईंट,मृदभांड,पुरानी लकड़ी,घड़ा पत्थर आदि मिलें हैं।इसके आलावे एक निश्चित वर्गाकार क्षेत्र में कंकड़ रहित काली मिट्टी हैं व शेष चारों तरफ जलोढ़ मिट्टी हैं।मिट्टी के टीले के अंदर प्राचीन दीवार सी मालूम पड़ती थी,जो रविवार रात्रि खुदाई में निकली है।विदित हो कि कैथा पोखर चांदन नदी के पूर्वी छोर से लगे बहियार में अवस्थित है।वहीं,चांदन नदी के पश्चिमी छोर के बेसिन में छठ पूजा के समय प्राचीन भवन के अवशेष मिले थे।जिसे देखने खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 13 दिसम्बर 2020 को आए हुए थे।उनके दिशा-निर्देश पर आज उक्त स्थल की खुदाई बिहार व देश स्तर पर हो रही है।रविवार को पुरात्तव से सम्बंधित एक टीम पटना से आई थी,जो शाम में रजौन प्रशासन के साथ उक्त पोखर का निरीक्षण करने निकल पड़े थे।हां,कुछ लोगों में अभी भी गौतम बुद्ध और महावीर तीर्थंकर की प्रतिमा को ले विरोधाभास है।इस सम्बंध में इतिहास के जानकार सह साहित्यकार प्रशांत कुमार और उनके सहयोगी एडिसन ने कहा कि उक्त स्थल के साथ-साथ उक्त प्रतिमा को देखा-परखा।उक्त मिली प्रतिमा गौतम बुद्ध की है।एक काले पत्थर पर एक बड़ी प्रतिमा गौतम बुद्ध की है।उनके केश विन्यास,खड़े रहने की स्थिति,लम्बे-लम्बे कान और फिर उनके बगल में यानी दरवाजे पर स्वागत करती हुई बिसाखा है,जो आगे चलकर उनकी प्रमुख शिष्याओं में से एक है।इन दो अंकित प्रतिमाओं के ऊपर पांच विभिन्न मुद्राओं में गौतम बुद्ध की और प्रतिमाएं हैं।विदित हो कि
गौतम बुद्ध के भदरिया(पूर्व नाम:भद्दई ) गांव आने का उल्लेख बौद्ध साहित्यों में है। वैशाली के बाद भगवान बुद्ध 12 सौ बौद्ध भिक्षुओं के साथ भदरिया गांव पधारे थे।बिम्बासार के राज्य में पांच श्रेष्ठियों में से एक श्रेष्ठी भदरिया गांव के मेंडक का जिक्र आता है।जब उन्हें इस बात की सूचना मिली कि गौतम बुद्ध स्वयं भिक्षुओं के साथ भदरिया गांव आ रहे हैं,तो उन्होंने अपने सात वर्षीय पोती विशाखा को अन्य कन्याओं के साथ गौतम बुद्ध का अतिथि सत्कार करने के लिए भेजा था।खुदाई के क्रम में मिली प्रतिमाओं में से एक बड़ी प्रतिमा गौतम बुद्ध और दरवाजे के बग़ल खड़ी स्वागत करती बच्ची कोई और नहीं बिसाखा है।इस प्रसंग को ही तत्कालीन कलाकार ने पत्थर पर उकेरा है,जो जाहिर करता है कि यह क्षेत्र तब बौद्ध धर्म के उपासकों का था।यानी समुचित क्षेत्र भदरिया -कैथा सभ्यता है।आगे विस्तृत खुदाई होने पर सम्पूर्ण स्थित साफ़ हो जाएगी।बिहार विरासत विकास सचिवालय रिचर्स मैन डॉ अमित कुमार ने अब तक प्राप्त किए गए पुरातत्व से संबंधित विस्तृत जानकारी डीएम सुहर्ष भगत को सोमवार को दे दी गई है।
रिपोर्ट :कुमुद रंजन राव
0 Comments
आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...