हर्षोल्लास से मनाई गई देवउठनी एकादशी

रजौन (बांका): प्रखंड क्षेत्र में सोमवार को देवोत्थान एकादशी धूमधाम से मनाई गई। रविवार से ही इसको लेकर लोगों में उत्साह एवं हाट-बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गई। इस दौरान बाजारों में 10-20 रुपया प्रति गन्ना बिका, साथ ही सुथनी-कन्ना आदि की भी खूब बिक्री हुई। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी या देवउठनी एकादशी पर्व कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, वे पुनः कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनो में देव शयन के कारण समस्त मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं और जब भगवान विष्णु जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य संपन्न होता है। श्रीहरि विष्णु के जगने के कारण इसको देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है, कहते हैं इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन तुलसी विवाह और दीप-दान का भी महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से बोले हे नाथ आप दिनरात जागते हैं और जब सोते हैं तो लाखों वर्ष के लिए सो जाते हैं। आप नियम से हर वर्ष शयन कर लिया करें। तभी से मान्यता है कि भगवान विष्णु प्रतिवर्ष चार मास के लिए वर्षा ऋतु में शयन करते हैं। इसी मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु देवोत्थान पर्व पर जागते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इस दिन विधि विधानपूर्वक पूजा अर्चना करने से पुण्य लाभ मिलता है। ज्योतिष शास्त्र तथा वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार एकादशी के दिन संध्या में भगवान विष्णु को गन्ने के मंडप में स्थापित कर, सुथनी, कन्ना, मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा आदि प्रसाद चढ़ाते हुए भजन कीर्तन, मंगल आरती करने के साथ पूजा करने का विधान है।

रिपोर्ट: केआर राव 

Post a Comment

आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...

Previous Post Next Post