जो लोग देव प्रबोधिनी एकादशी का व्रत रखते हैं उनके लिए आज नियम है कि दशमी तिथि को साग, मसूर दाल, लहसुन प्याज का त्याग करें। इस दिन अरवा चावल, अरहर दाल, कद्दू, आलू, परवल, गोभी की शब्जी पकाकर भोजन करना चाहिए। और कल एकादशी के व्रत के दिन प्रातः स्नान करें और प्रबोधिनी एकादशी व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की पूजा करें। धी का दीप जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।। मन्त्र का जप करें। शाम के समय भगवान को फिर स्नान करवाकर पूजन करें और नवीन वस्त्र पहनाएं और गन्ना सहित विभिन्न फलों का भोग लगाकर पूजा आरती करें।पूजन के बाद भगवान को जगाने का मंत्र बोलते हुए घर के चार बड़े लोगों को भगवान को आपने जिस चौकी पर रखा है उसे तीन बार उठाना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की कथा और सहस्रनाम का पाठ और आरती करें। फिर अगले दिन यानी द्वादशी तिथि यानी मंगलवार को भगवान की पूजा कर प्रातः 9 बजे तक तुलसी और आंवला खाकर व्रत का पारण करें। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर या किसी पंडित को अन्न दान देकर स्वयं अन्न ग्रहण करें।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*