हिन्दू तन-मन हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय:अटल बिहारी बाजपेयी


अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनको हिन्दूवादी, उद्दारवादी, राष्ट्रवादी, विकासवादी आदि शब्दों से अलंकृत किया गया,इन सारे गुणों के व्यक्तित्व से परिपूर्ण वाजपेयी को भारत रत्न की उपाधि तभी दी गयी। वाजपेयी अपने  किशोर अवस्था में एक अद्भुत कविता लिखी थी - ''हिन्दू तन-मन हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय", जिससे यह पता चलता है कि बचपन से ही उनका रुझान देश भक्ति के तरफ था।इसलिए युवावस्था से हिंदू कार्य करने के लिए उन्होंने अपनी शादी तक नहीं कि, जिसके लिए रास्ता उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और बीजेपी को चुनाव किया। राजनीति में हिंदूत्व के लिए अपना आराध्य राम को बनाया, जिसकी शूरूआत दो सांसद बनने - बनाने की भूमिका से की और सुखद परिणाम यह हुआ कि राम ने उनको प्रधानमंत्री तक बना दिया। बाजपेयी ने हिन्दू और हिन्दूत्व की परिभाषा देश और राष्ट्रभक्ति को बताया,उन्होंने सम्प्रदाय विशेष में बांधकर नहीं रखा, जिसकी पुष्टि भारत का सर्वोच्च नायायलय भी 1995 में (जस्टिस जे एस वर्मा की पीठ) अपने एक  फैसले में हिंदूत्व को जीवन शैली बताया। 

सर्वोच्च न्यायलय की व्याख्या पश्चात भारत के बुद्धिजीवियों में लहर सी दौड़ पड़ी, जिसका परिणाम कालान्तर में यह हुआ कि कांग्रेस का छद्म हिन्दू धर्म निरपेक्षता चरमरा कर ढ़ह गया और बाजपेयी ने राष्ट्रवाद की परिभाषा अपने हिन्दूतत्व से गढ़कर स्थापित करने में सफल रहे। सफल ही नहीं रहे, ब्लिक भारत जैसे विशाल साम्राज्य पर शासन भी किए। बाजपेयी ने राष्ट्रीयता और राष्ट्रभक्त होने का सबसे बडा प्रमाण होने का तब दिया, जिस समय विश्व का कोई देश अमेरिका को आंख दिखा  नहीं सकता था। बाजपेयी ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। जिसकी भनक पश्चिमी देशों को लगने तक नहीं दी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों ने भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाया, लेकिन वाजपेयी ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए देश को आर्थिक समृद्धिशाली बनाया।

बाजपेयी की उदारवादिता में उनके विरोधी और दुश्मन भी समाहित हो जाते हैं, उनके प्रधानमंत्री काल में, जब विदेश में राहुल गांधी पर एक अपराधिक मुकद्दमा दर्ज हुआ था।उस समय सोनिया गांधी के पहल पर राहुल गांधी के छात्र जीवन को बचाते हुए उन्होंने अपराधिक मुकद्दमा समाप्त करायी थी, इतना ही नहीं उनके विशाल ह्दय का पता तब चलता है, जब उन्होंने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल करते हुए19 फरवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की।जिसका उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की पहल की।

बाजपेयी सम्पूर्ण  भारत में विकास की गंगा बहायी, जिसके लिए कई योजनाओं को उन्होंने लागू किया, जिसमें स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना अद्भूत रहा।इतिहास साक्षी है कि भारत में सम्राट शेरसाह शूरी के बाद बाजपेयी पहला शासक थे, जिन्होंने भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत की। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्गों से उनके काल में जोड़ा गया। इसके बाद बाजपेयी जी का ऐतिहासिक कार्य एक सौ वर्ष से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाना था।विकास को उन्होंने सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया।राष्ट्रीय नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले वो महत्वपूर्ण कदम उठाये।उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित की।

बाजपेयी जी एक सफल राजनेता होने के साथ-साथ एक साहित्यकार और कवि भी थे।उनके प्रकाशित कविता में कैदी कविराई कुंडलियां शामिल हैं, जो 1975-77 आपातकाल के दौरान अपने कैद किए गए दौरान कविताओं का संग्रह लिखा था।बाजपेयी आपने कविता के संबंध में लिखा है कि, "मेरी कविता युद्ध की घोषणा है, हारने के लिए एक निर्वासन नहीं है। यह हारने वाले सैनिक की निराशा की ड्रमबीट नहीं है, लेकिन युद्ध योद्धा की जीत होगी। यह निराशा की इच्छा नहीं है लेकिन जीत का हलचल है चिल्लाओ। " बाजपेयी की कविता में केवल उड़ान नहीं है, उनके कविताओं में यथार्थ दिखाई पड़ता है, ऐसा यथार्थ जो जीवंत है। कारगिल युद्ध और परमाणु परीक्षण विस्फोट उदाहरण स्वरूप है। मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है।




लेखक -:

प्रो. अरविन्द नाथ तिवारी

विभागाध्यक्ष (इतिहास विभाग)

पीयूएसटी महिला महाविद्यालय

बगहा पश्चिम चम्पारण

बिहार


Post a Comment

आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...

Previous Post Next Post