" सत्कर्म करो "

कण-कण सुवासित  धरा की हो 
तुम ऐसा पावन कर्म करो 
जन्मे हो भारत भूमि पर 
सत्कर्म करो, सत्कर्म करो 
पथ मे तुमको व्याल मिले 
या शत्रु बनकर काल मिले 
तुम पीठ कभी ना दिखलाना 
चाहे वो विघ्न कराल मिले 
आग न जार सके तुमको 
अपने को इतना गर्म करो 
जन्मे हो भारत भूमि पर 
सत्कर्म करो, सत्कर्म करो 
पल मे रिपु दल का दमन करो 
स्वदेश मे कायम अमन करो 
तुम अपने शौर्य पताका से 
देव लोक के जैसा चमन करो 
धधकते उर के ज्वाला से 
पर्वत पिधलाकर नर्म करो 
जन्मे हो भारत भूमि पर 
सत्कर्म करो, सत्कर्म करो 
कंदर्प न तुमको डिगा सके 
सागर न तुमको भीगा सके 
अंबर को दबा लो सीने मे 
फिर पार कोई भी पा न सके 
अपने भुजबल के बल तुम 
भारत से दूर अधर्म करो 
जन्मे हो भारत भूमि पर 
सत्कर्म करो, सत्कर्म करो 

                    -:  नवल प्रसाद , बेतिया, प -चम्पारण

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