रात अंधेरी थी !


सर्द  मौसम था । रात के 12:30 बजे थे। 

रास्ता पूरी तरह सुनसान था। मैं स्टेशन से घर आ रही थी। सारे लोग मेरे उतरने से पहले ही ऑटो से उतर गए। 

ऑटो में अब सिर्फ मैं ही बची थी। 

ऑटो वाले का नजरिया मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था ऊपर से वो मुझसे सवाल पे सवाल किए जा रहा था


मैम आप इतनी रात को कहाँ से आ रही हो ?

आपको कोई लेने नहीं आया ?

आपको जाना कहाँ है ?

घर में कौन-कौन है ?

ऐसे अनगिनत सवाल से मैं परेशान हो गई थी फिर सोचा थोड़ी देर में इससे पीछा छूट ही जाएगा और मैं भी उल्टे-पुलटे जवाब देने लगी।


मैंने उससे कहा मीना बाजार में ही मेरा घर है हालांकि मुझे घर पहुंचने में वहाँ से पैदल 15-20 मिनट लगता लेकिन मैं इस ऑटो वाले से जल्दी से जल्दी पीछा छुड़ाना चाहती थी और मैं मीना बाजार उतर गई और उसे पैसे देकर मैं आगे बढ़ी। 


10-12 कदम आगे बढ़ने के बाद मैं पीछे मुड़ी तो देखा वो ऑटो वाला मेरी तरफ ही आ रहा है। 

ऐसे मुझे डर लगता नहीं है लेकिन फिर भी मैं थोड़ी सी सतर्क हो गई। 

उसने मेरे पास ऑटो लाकर रोक दिया और बोला मैडम आपने तो कहा था यही जाना है और आगे बढ़ते जा रहे हो। मैंने थोड़ी हिम्मत करके कहा हाँ पास में ही जाना है। 


आगे उसने कोई सवाल नहीं किया और बोला मैडम आप बैठो जहाँ जाना है मैं छोड़ देता हूँ बहुत रात हो गई है। उसके चेहरे पे चिंता का भाव साफ नजर आ रहा था फिर भी मैंने कहा 

मैं एक्स्ट्रा पैसे नहीं दे रही हूँ लेकिन उसका जवाब सुनके मैं निरुत्तर हो गई। 

उसने कहा मैडम आप निश्चित होकर बैठो। आप मेरी बहन जैसी हो और आपको सुरक्षित घर पहुंचाना मेरी  जिम्मेदारी है। 


मैं ऑटो में बैठ गई लेकिन अब उस घूरती नजर में मुझे एक स्नेहिल और जिम्मेदार भाई नजर आ रहा था।

 अब मैं बिल्कुल निश्चित थी और मुझे खुद पे गुस्सा आ रहा था बेकार ही मैं एक भले इंसान पे शक कर रही थी। 


फिर थोड़ी ही देर में हम अपने गंतव्य पर पहुंच गए। 

मैंने उस ऑटो वाले भैया को सॉरी बोला तो उसने यही कहा बहनें आप जैसी ही होनी चाहिए। 

आपने जो किया बिल्कुल सही किया। 

आपको माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। 


मैं उसे पैसे देने लगी तो बोला आपने तो कहा था

 पैसे नहीं है फिर। 

मैं उसके हाथ में पैसे रखी और थैंक्स बोली। 

फिर मैंने कहा भैया काश हमारे देश के सारे भाई आपकी तरह होते तो कोई बहन असुरक्षित नहीं होती। 

मैं उस भाई को नमस्ते बोलकर अपने घर आ गई लेकिन दिल बार-बार उस भाई को दुआएं दे रहा था।


सचमुच दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है।

 फर्क तो बस नजर और नजरिया का है।

 आज मैं दिल से अपने सारे अनजान लेकिन जिम्मेदार भाइयों के लिए दुआ करती हूं।🙏


✍️ शमी बरनवाल🌹

    बेतिया, प० चंपारण

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