त्याग, समर्पण,संघर्ष, उसूल, रसूख इनसे बुनकर तैयार हुईं देश की गौरव स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर जी का निधन बहुत ही दुखद है,उनका जाना देश और संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.जैसे वसंत पंचमी के अगले दिन हम सब की माँ सरस्वती की विदाई होती है .ठीक वैसे ही आज लता जी भी चली गईं.लेकिन जैसे माँ सरस्वती हम सब के पास ही रहती हैं ठीक वैसे ही लता जी भी रहेंगी।वे सभी संगीत साधकों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत थीं और रहेंगी.पुण्यात्मा को पूरे भारत परिवार की ओर से स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूँ।
लता दी के निधन के बाद राष्ट्रपति भवन और संसद भवन पर तिरंगा झंडा आधा झुका दिया गया है।भारत में लता मंगेशकर की याद में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा।
देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने खुद लता मंगेशकर से अनुरोध किया कि वह फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' के गाने में अपनी आवाज दें। राजेंद्र प्रसाद के अनुरोध को लता मंगेशकर टाल नहीं पाईं और उन्होंने फिल्म का टाइटल सॉन्ग गाया।
पूरा विश्व उनके शोक में हैं।भारत के प्रथम प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक उनके प्रसंसक रहे हैं।लता दी हर उम्र के लोगो के दिलों मे राज करती रहेगीं।उनका जाना विश्व जगत के लिए अपूर्ण दुःख की घड़ी हैं।
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर, 1929 इंदौर में हुआ था।वह भारत सहित विश्व की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका थीं।उनका गायिकी के क्षेत्र में छ: दशकों का कार्यकाल कई उपलब्धियों से भरा पड़ा है।हालाँकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं।उनकी एक खास पहचान भारतीय सिनेमा में एक पाश्रर्व गायिका के रूप में रही है। अ
लता की जादुई आवाज़ के भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। 'टाईम' पत्रिका ने उन्हें भारतीय पाश्र्व गायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है।लता जी को भारत सरकार ने 'भारतरत्न से सम्मानित किया है।वह सच्चे अर्थों में भारत की एक रत्न के रूप में हमेशा चमकती रहेगी।लता मंगेशकर की गायकी से प्रभावित होकर देश विदेश के कई प्रतिभाशाली गायकों ने गायकी को ही अपना कैरियर बनाया।लता मंगेशकर गायिकी की गुरु माता के रूप में पूजी जाती रही हैं।लता मंगेशकर को हर उम्र के लोग लता दीदी के ही नाम से पुकारते हैं ।उनके न रहने पर भी उनके चाहने वाले लता दीदी ही कह कर उन्हें पुकार रहे हैं।यह लता दीदी की गायकी और उनके सहज, मृदुल व्यवहार का परिचायक है। उनकी गायकी जितनी निराली रही, उनका व्यक्तित्व और कृतित्व भी उतना ही निराला रहा।उनकी सहजता और मृदुलता सदा लोगों को अपनी ओर प्रेरित करता रहेगा।विश्व की जानी मानी गायिका होने के बावजूद उनमें रत्ती भर भी घमंड नहीं था।उनसे, गायिकसीखने आए नए कलाकारों को गायकी का मंत्र बहुत ही सहज और सरल तरीके से बताती रही थीं।
लता जी के इंदौर शहर के पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बड़ी पुत्री थी। दीनानाथ मंगेशकर एक मध्यवर्गीय परिवार आते थे।उनके पिता रंग मंच एलजीके कलाकार और गायक थे। इनके परिवार से भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनों उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर,और आशा भोसलेसभी ने संगीत को ही अपनी आजीविका के लिये चुना।लता जी अपने भाई और बहनों के साथ संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर से ही प्राप्त की थी।सभी भाई बहनों में बचपन से ही गायकी के गुण विद्यमान थे।लता दीदी का जन्म इंदौर में हुआ था ।लेकिन उनकी परवरिश महाराष्ट्र में हुई थी वह बचपन से ही गायक बनना चाहती थीं।बचपन मे कुंदन लाल सहगल की एक फ़िल्म चंडीदास देखकर उन्होने कहा था कि वो बड़ी होकर सहगल से शादी करेगी। पहली बार लता जी ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म 'कीर्ती हसाल 'के लिये गाया।उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फ़िल्मों के लिये गाये,इसलिये इस गाने को फ़िल्म से निकाल दिया गया।लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुये थे।
पिताजी की मृत्यु के बाद दीदी को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा था।उन्हें अभिनय बहुत पसंद नहीं था,लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की वज़ह से पैसों के लिये उन्हें कुछ हिंदी और मराठी फ़िल्मों में काम करना पड़ा। अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फ़िल्म 1942 में पाहिली मंगलागौर आई थी।इस फिल्म में उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी।बाद में उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझेबाल,चिमुकलासंसार,गजभाऊ, बड़ीमाँ ,जीवन यात्रा ,माँद ,छत्रपति शिवाजी शामिल थी।बड़ी माँ,में लता ने नूरजहां के साथ अभिनय किया और उसके छोटी बहन की भूमिका निभाई आशा भोंसले ने।उन्होंने खुद की भूमिका के लिये गाने भी गाये और आशा के लिये पार्श्वगायन किया।
वर्ष 1942 ई में लताजी के पिताजी का देहांत हो गया था।उस समय लता मंगेशकर जी की आयु मात्र तेरह वर्ष थी।भाई बहिन में बड़ी होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी का बोझ भी उनके कंधों पर आ गया था।दूसरी ओर उन्हें अपने करियर की तलाश भी थी।जिस समय लताजी ने 1948 में पार्श्वगायिकी में कदम रखा था।तब इस क्षेत्र में नूरजहां,अमीरबाई, कर्नाटकी,शमशाद बेगम,और राजकुमारी आदि की तूती बोलती थी । ऐसे में उनके लिए अपनी पहचान बनाना इतना आसान नही था।लता जी का पहला गाना एक मराठी फिल्म कीति हसाल के लिए था,मगर वो रिलीज नहीं हो पाया था।स्वर कोकिला लता मंगेशकर को गायकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए एक लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ा था।उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता जी फिल्म में गायन करें,लेकिन घर की जवाबदेही के कारण उन्हें इस मंजिल की ओर रुख करना पड़ा था और 1945 में उस्ताद गुलाम हैदर,जिन्होंने पहले नूरजहाँ की खोज की थी,अपनी आनेवाली फ़िल्म के लिये लता जी को एक निर्माता के स्टूडियो ले गये थे,जिसमे कामिनी कौशल मुख्य भूमिका निभा रही थी।वे चाहते थे कि लता उस फ़िल्म के लिये पार्श्वगायन करे। लेकिन गुलाम हैदर को निराशा हाथ लगी।1947 में वसंत जोगलेकर ने अपनी फ़िल्म आपकी सेवा में में लता को गाने का मौका दिया।इस फ़िल्म के गानों से लता की खूब चर्चा हुई। इसके बाद लता ने मज़बूर फ़िल्म के गानों "अंग्रेजी छोरा चला गया"और "दिल मेरा तोड़ा हाय मुझे कहीं का न छोड़ा तेरे प्यार ने" जैसे गानों से अपनी स्थिती सुदृढ की,हालाँकि इसके बावज़ूद यह फ़िल्म अत्यंत सफल रही थी। लता जी तथा मधुबाला दोनों के लिये बहुत शुभ साबित हुई।इसके बाद लता जी ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा था।उन्होने अपना पहला गाना मराठी फिल्म 'किती हसाल',कितना हंसोगे, 1942 में गाया था।इस फिल्म के गाने से लता जी की खूब चर्चा हुई थी। इसके बाद लता जी ने मजबूर फिल्म के लिए गाई थी।यह गाना 'अंग्रेजी छोरा चला गया,और दिल मेरा तोड़ हाथ मुझे कहीं का ना छोड़ा,तेरे प्यार' ने जैसे गाना से उनकी स्थिति सुदृढ़ हो गई थी।हालांकि इसके बावजूद लता जी को उस खास की भी तलाश थी ।
1949 में ऐसा मौका फिल्म महल में, 'आयेगा आने वाला,'गीत से मिला।इस गीत को उस समय की सबसे खूबसूरत और चर्चित अभिनेत्री मधुबाला पर फिल्माया गया था।यह फिल्म अत्यंत सफल रही थी। लता जी तथा मधुबाला दोनों के लिए यह फिल्म बहुत ही शुभ साबित हुई थी।इसके बाद लता जी ने कभी पीछे मुड़कर देखा नहीं था।लता मंगेशकर ने अब तक तीस हजार से अधिक गाने गा चुकी हैं।लता मंगेशकर ने 1980 के बाद फिल्मों में गाना कम कर दिया था।उन्होंने स्टेज शो पर ज्यादा ध्यान देना प्रारंभ किया था। लता मंगेशकर ने आनंद धन बैनर तले फिल्मों का भी निर्माण किया था। इन फिल्मों में संगीत भी उन्होंने ही दिया था ।1962, 1965, 1969, 1993 और 1994 में उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।1972, 1975, 1990 में उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया था । 1969 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था । 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गाने का गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड से भी उन्हें सम्मानित किया गया था। 1989 में दादा साहेब पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया था। 1993 में लाइफटाइम अचीभमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2001 में उन्हें भारत रत्न सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया था।
"देश की शान और संगीत जगत की शिरमोर स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर जी का जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है। वे सभी संगीत साधकों सहित भारत लिए सदैव प्रेरणा रहेगीं।"
(लेखक -अमित कुमार)

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