बांका:चिलचिलाती धूप में जब गांव की महिलाएं और बच्चे पेड़ के नीचे बैठ कर कोई दौना, कोई दतवन बना रही थी। उसी वक्त गांव में अपने प्रखंड के बीडीओ को देख कर सभी रविवार को भौचक्के रह गये। बीडीओ राकेश कुमार ने खुद ही ग्रामीण महिलाओं को अपना परिचय दिया।औऱ वही जमीन पर बैठ कर लोगो का हाल चाल लेने लगे। यह मामला प्रत्येक रविवार को बीडीओ द्वारा किसी न किसी गांव में किया जाता है। उनकी यह मंशा होती है कि छुट्टी के दिन उनका अधिकतर समय ऐसे गांव में गुजरे जहां पूर्व से कोई अधिकारी बर्षो से नही गये हो। इसी दौरान इस रविवार को बीडीओ राकेश कुमार बिना किसी पंचायत प्रतिनिधि को जानकारी दिये सिर्फ सरकारी वाहन पर अपने चालक के साथ प्रखंड की सीमा पर अवस्थित नक्सल प्रभावित पंचायत दक्षिणी कसावावसीला पंचायत के सबसे सुदूर गांव खिजुरिया चले गए। जहां आदिवासी के अलावे दलित परिवार की संख्या सबसे अधिक है।वहां पहुंच कर कई घरों में जाकर खुद जमीन पर बैठ कर बीडीओ ने ग्रामीण महिलाओं ने उसके रोजगार,बच्चों की पढ़ाई,सरकारी योजना का लाभ,शराब बंदी,पीडीएस दुकानों की स्थिति राशन,औऱ आवास से संबंधित जानकारी प्राप्त किया। रविवार के दिन बीडीओ के इस प्रकार के काम से ग्रामीण महिलाओं में काफी खुशी है। ग्रामीण रीना देवी,भगवतिया देवी,सुमित्रा देवी,मंजू देवी,कारी देवी ने कहा कि हम लोगो ने आज तक बीडीओ को अपने गांव में नही देखा था।लेकिन इन्होंने खुद गांव आकर हमसे बातचीत किया औऱ हमारी हर समस्या को सुना। वही बीडीओ राकेश कुमार बताते है कि रविवार को मैं खुद ऐसे गांव का चयन करता हूं जो सबसे अधिक पिछड़ा है। औऱ प्रखंड कार्यालय से कटा रहता है।उनसे उनकी समस्या सुनकर उसे दूर करने का काम किया जाता है।
बीड़ीओ ने रविवार को गांव जाकर सुनी समस्या,महिलाएं काफी खुश
byआमोद कुमार दुबे
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