दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) :प्रखंड में सरकारी विद्यालयों की स्थिति ठीक नहीं है। शिक्षा से लेकर मध्याह्न भोजन , पेयजल , शौचालय इत्यादि की हालत बदतर है। कोरोनाकाल के बाद सरकार ने हरेक विद्यालयों में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके बाद भी विद्यालय में व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।प्रखंड मुख्यालय के समीप आदर्श मध्य विद्यालय शंभुगंज में बच्चों को पानी पीने की समुचित व्यवस्था नहीं है। बच्चे चापानल पर खुद से हाथ लगाकर अपनी प्यास बुझाते हैं। विद्यालय में मध्याह्न भोजन के बाद बच्चे थाली लेकर सीधे चापानल पर दौड़े आते हैं , और गंदे हाथों से चापानल चलाकर पानी पीते हैं। इस स्थिति में एक तो बच्चों के पेट के अंदर गंदगी प्रवेश करता ही है। दूसरा संक्रमण फैलने का भी खतरा प्रवल हो सकता है।बच्चे तो नासमझ होते हैं , लेकिन शिक्षकों पर भी इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।विद्यालय के छात्र रवि कुमार , दीपक कुमार , गुलशन कुमाप , प्रिया , चंपा , श्वेता सहित अन्य ने बताया कि विद्यालय में पानी पीने के लिए और कोई व्यवस्था नहीं है।जिसके कारण प्यास लगने पर हाथ लगाकर पानी पीते हैं।जबकि सभी विद्यालयों में भोजन के पहले और बाद में हाथ धोने के लिए अलग से पानी और साबून व्यवस्था रखने का प्रावधान हे। यह स्थिति सिर्फ शंभुगंज विद्यालय की नहीं , बल्कि कमोवेश प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों की है। इस संबंध में विद्यालय प्रभारी रंजन कुमार ने बताया कि विद्यालय में पानी पीने के लिए बर्तन उपलब्ध है। कुछ शरारती बच्चे सीधे चापानल से पानी पी लेते हैं। इस संबंध में बीइओ आमोद कुमार ने बताया कि सभी विद्यालयों में एमडीएम मद से थाली , ग्लास इत्यादि बर्तन की व्यवस्था है।अब यदि बच्चे खुद हाथ से पानी लगाकर पीते हैं तो यह प्रबंधन की कमजोरी है।बताया कि बैठक कर सभी विद्यालय प्रभारी को निर्देशित भी किया गया है।