दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : भारतीय कृषि मानसून के साथ एक जूआ है।खासकर प्रखंड क्षेत्र बर्षा पर आश्रति है। इस बार मानसून की बेरूखी के कारण खेती - किसानी पर संकट मंडरा रहा है।प्रखंड कृषि कार्यालय के अनुसार अबकि प्रखंड के 19 पंचायतों में धान रोपाई का लक्ष्य 9800 हेक्टेयर में है। अभी तक करीब आठ प्रतिशत खेती हुई है , वह भी बोरिंग और पंपिंग मशीन के दम पर ।सावन और भादो यह दो माह धान रोपणी के लिए सबसे अनुकूल समय है।सावन मास में बर्षा नहीं के बराबर हुई ।अब भादो मास में कड़ाके की धूप देख किसानों के मानों अरमान जल रहे हैं। अब तो कई गांव के किसान हताश और निराश होकर पलायन करने लगे हैं।कई जगहों पर किसान एक श्वर से सुखाड़ की मांग करने लगे हैं ।कुर्मा गांव के किसान राजाराम सिंह ने बताया कि जीविका का मुख्य साधन धान है। बर्षा नहीं होने से धान खेती पर खतरा मंडराने लगा है।अधिकांश किसानों के बिचड़ा जलकर बर्बाद हो गया।जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि लोगों को पानी पीने के लिए नहीं मिल रहा है तो खेती करना कैसे संभव है।सरकार को सुखाड़ घोषित करनी चाहिए, मोहनपुर गांव के किसान विजय कुमार सिंह ने बताया कि यहां के खेती बर्षा पर आश्रित है ।बताया कि मानसून की स्थिति को भांप शुरू में बिचड़ा लगाए। बाद में मानसून की बेरूखी से परेशानी बढ़ गई ।काफी मेहनत और खर्च के बाद बोरिंग के माध्यम से करीब दो - तीन एकड़ धान खेती किए , लेकिन बर्षा नहीं होने से वह भी बर्बादी के कगार पर है।डाका गांव के किसान रामजी यादव ने बताया कि भादो मास में 50 फीसद तक खेती का काम हो जाता था , लेकिन इस बार मुश्किल से पांच प्रतिशत भी खेती नहीं हो सका।यदि खेती नहीं होती है तो किसानों के सामने भूखमरी की समस्या होगी। सरकार को सुखाड़ क्षेत्र घोषित कर देनी चाहिए। इसके अलावे प्रखंड के अन्य सभी किसानों ने भी सरकार से सुखाड़ घोषित करने की मांग की है।इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी चितरंजन प्रसाद ने बताया कि करीब सात से आठ प्रतिशत तक धान रोपाई का काम हुआ है ।अभी दो सप्ताह तक खेती का अनुकूल समय है। यदि बर्षा नहीं होती है तो किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए भी जागरूक करने का काम जारी है।