बांका: चांदन थाना में लगने वाले जनता दरबार मे जिस विवाद का निपटारा दोनों पक्षों के कागजात को देखते हुए और उस कागजात को जांच कराकर सही पाए जाने के बाद 90 साल से दखल में रहे आवेदक हेमंत कुमार दुबे के दावे को सही पाते हुए विपक्षी को जमीन पर जाने से रोकने का आदेश पारित किया गया था। उसी विवाद वाली विवादित जमीन को प्रखंड मुख्यालय के सरपंच द्वारा जनता दरबार मे थानाध्यक्ष और सीओ के आदेश को दरकिनार करते हुए दोनों पक्षों को उस जमीन पर जाने से रोक दिया। जिससे सभी कागजात और 90 साल के दखल को सरपंच द्वारा रोकने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जबकि किसी भी विवादी जमीन पर सरपंच को रोक लगाने का अधिकार नहीं है। इसके लिए अनुमंडल कार्यालय द्वारा धारा 144 के तहत ही रोक लगाई जा सकती है। इस संबंध में पूछने पर सीओ प्रशांत शांडिल्य ने कहा कि प्रथम पक्ष हेमंत कुमार का कागजात पूरी तरह सही है और उस जमीन पर उसका दावा पूर्व से भी बना हुआ है। इसलिए उसके दावे को रोकना न्याय के हित में सही नहीं होगा। वही सरपंच राकेश कुमार वर्णवाल ने कहा कि उस जमीन पर जाने से दोनों पक्षों में मारपीट हो सकती थी। इसीलिए उसने दोनों पक्षों को वहां जाने से रोक दिया है। और अभिलेख को अनुमंडल कार्यालय में बढ़ाया गया है। सरपंच के इस आदेश के बाद अब यह बात लोगों की चर्चा में है कि सीओ और थानाध्यक्ष के आदेश को सरपंच किस आधार से खारिज कर सकता है। जबकि चांदन ग्राम कचहरी में न्याय मित्र भी नही है। ऐसे में इस ग्राम कचहरी के आदेश को कहां तक उचित माना जाएगा। इस आदेश के बाद सीओ ने थानाध्यक्ष से जबरन जमीन रोकने वाले पर कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।