दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : प्रखंड क्षेत्र में अबकि मौसम की बेवफाई की मार किसानों को झेलना पड़ रहा है। भादो मास का सिंह नक्षत्र धान रोपाई का सबसे उत्तम माना जाता है ।अब तो यह नक्षत्र भी समाप्त हो रहा है। प्रखंड कृषि कार्यालय के अनुसार प्रखंड में अब तक मात्र 26 प्रतिशत धान रोपाई का काम हुआ है ।इसमें भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान रोपाई के बाद भी किसान हरेक दूसरे दिन फसल बचाने के लिए खेतों में पानी दे रहे हैं। मौसम की बेरूखी के कारण प्रखंड में अब किसानों का धान की खेती से मोह भंग हो गया । किसान वैकल्पिक खेती करने में जूट गए हैं ।रविवार को कई किसानों ने अपने खेतों में धान की जगह अरहर और मूली लगाना शुरू कर दिया है । प्रकृति विमुख होने के कारण इस बार मौसम ने इस तरह करवट फेरा कि जिन खेतों में धान के पौधे लहलाते नजर आती थी , आज धूल उड़ रही है। किसान प्रभाकर सिंह , राजाराम सिंह , कुंदन कुमार , अजय यादव , कैलाश मंडल सहित अन्य ने बताया कि जीविका का मुख्य साधान धान है ।धान की खेती के लिए बड़ी अरमान लगाकव बिचड़ा गिराए , लेकिन पानी के कारण खेती - किसानी चौपट हो गया । जीविका का आधार के लिए अंत में धान की जगह अरहर और मूली लगा रहे हैं । इसमें भी किसान डरे - सहमें फसल लगा रहे हैं कि कहीं मौसम का मिजाज बदल न जाए और मेहनत पर पानी न फेर जाए । प्रखंड कृषि पदाधिकारी चितरंजन चौधरी ने बताया कि प्रखंड में धान रोपाई की स्थिति ठीक नहीं है । शंभूगंज प्रखंड में धान रोपाई का लक्ष्य 9800 हेक्टेयर है । जिसमें मात्र 26 प्रतिशत धान रोपाई का काम हुआ । अब यदि बर्षा भी होती है तो शत - प्रतिशत अच्छादन संभव नहीं है । किसान अरहर , मूली , कुलथी , सरसों इत्यादि की खेती कर सकते हैं ।