बांका: छठव्रत महिलाओं का व्रत माना जाता है। लेकिन बांका जिले का एक गांव ऐसा भी है जहां पुरानी परम्परा का पालन करते हुए सिर्फ पुरुष वर्ग ही करते है छठव्रत।
जिले के कटोरिया प्रखंड अंतर्गत पिपराडीह एक ऐसा गांव है, जहां सिर्फ पुरुष वर्ग ही छठ व्रत करते हैं. ये लोग पूरी निष्ठा के साथ यह व्रत करते हैं. पुरुष वर्ग के छठ करने की परंपरा पूर्वजो से चली आ रही है.
अब कुछ महिलाएं भी करने लगी है छठ व्रत
जिले से 35 किलोमीटर दूर बसे भोरसार के पिपराडीह गांव में आज तक किसी महिला ने छठ पर्व नहीं किया है. गांव के सभी परिवार में पुरुष ही छठ व्रत करते हैं. इस पंचायत में छठ व्रत करने वालों में पुरुषों की संख्या अधिक रहती है अब कुछ महिलाएं भी यह व्रत करने लगी है। इस पंचायत की आबादी 5000 से अधिक है, जिसमें पिपराडीह गांव की आबादी 1000 है. इस गांव में दर्जनों की संख्या में पुरुष छठ व्रत करते हैं. छठ व्रत करने वालों का कहना है कि इस गांव में कई पीढ़ियों से पुरुष ही छठ व्रत करते आ रहे हैं। बुजुर्ग बताते है कि इस गांव में लड़कियों के पैदा होने पर कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो जाती थी।उसी को जीवन दान मिले,औऱ वह सभी निरोगी काया हो उसी के लिए पुरुष वर्ग छठ करते थे। जिसका पालन आज भी हो रहा है।
पूर्वजो की परंपरा का पालन कर रहे हैं पुरूष-
लोगों का कहना है कि पूर्वजो द्वारा छठ करने की पुरानी परंपरा का पालन लोग आज भी कर रहे हैं. गांव में पुरुषों के छठ व्रत करने से ही गांव का कल्याण और हर प्रकार के कष्टों से निदान होता है. लगातार 20 वर्षों से व्रत करने वालों में बाबूलाल यादव,लीलाधर यादव,जीवलाल यादव,गणेश यादव,छब्बू,शंकर,सुबोध,योगेंद्र इत्यादि ने बताया कि हम लोगों के पूर्वज ही छठ व्रत की परंपरा को संभालते थे. उसी का निर्वहन हम आज तक कर रहे हैं. जब तक इस गांव की आबादी रहेगी, तब तक पुरुष छठ व्रत करते रहेंगे.
सहयोग करती हैं महिलाएं-
महिलाएं काफी बढ़ चढ़कर इसमें सहयोग करती हैं. इतना ही नहीं दूसरे गांव की महिलाएं भी अब धीरे-धीरे छठ व्रत करने लगी हैं. लेकिन यहां अभी भी पुरुषों की संख्या ज्यादा है. पुरुषों के छठ करने की यह परंपरा इनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है. उसी का पालन करते हुए हर घर में एक पुरुष छठ पर्व करके काफी खुशी महसूस करते हैं. उनका मानना है कि इससे गांव का कल्याण होता है.
महिलाएं काफी बढ़ चढ़कर इसमें सहयोग करती हैं. इतना ही नहीं दूसरे गांव की महिलाएं भी अब धीरे-धीरे छठ व्रत करने लगी हैं. लेकिन यहां अभी भी पुरुषों की संख्या ज्यादा है. पुरुषों के छठ करने की यह परंपरा इनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है. उसी का पालन करते हुए हर घर में एक पुरुष छठ पर्व करके काफी खुशी महसूस करते हैं. उनका मानना है कि इससे गांव का कल्याण होता है.

