अब..... नही रहे अमरनाथ झा

अब..... नही रहे अमरनाथ झा

चम्पारण नीति/ बेतिया (पश्चिमी चम्पारण)  "पत्रकार अमरनाथ आज अमर हो गए "
      देश के नामचीन साथियों के साथ पत्रकार अमरनाथ झा

​भारतीय पत्रकारिता के एक देदीप्यमान नक्षत्र, प्रखर सामाजिक-पर्यावरणिक चिंतक और हम सबके श्रद्धेय अमरनाथ झा (अमरनाथ भैया) आज इस भौतिक संसार को अलविदा कहकर अनंत यात्रा पर निकल गए। उनका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के एक शुचितापूर्ण युग का अवसान है। पटना की गलियों से शुरू हुआ उनका पत्रकारिता का सफर दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी तक फैला। 'पाटलिपुत्र टाइम्स', 'पूर्वांचल प्रहरी' (गुवाहाटी) और 'जनसत्ता' (कोलकाता) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में अपनी लेखनी से उन्होंने न केवल खबरों को जीवंत किया, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बने।
​वे सिर्फ घटनाओं को दर्ज करने वाले पत्रकार नहीं थे, बल्कि जमीन से जुड़े एक ऐसे चिंतक थे जिन्हें नदियों के सूखने का दर्द था, पर्यावरण के बिखरने की चिंता थी और समाज के टूटने का मलाल था।
​'जन सरोकार' के संपादक श्री संजय झा, जाने-माने नदी विशेषज्ञ कुमार कलानंद मणि, स्व. रणजीव जी और युवा जल योद्धा भगवानजी पाठक जैसी शख्सियतों के साथ उनका आत्मीय जुड़ाव इस बात का प्रमाण था कि उनका पूरा जीवन प्रकृति, संस्कृति और समाज को समर्पित था। वे वैचारिक रूप से जितने समृद्ध थे, व्यवहार में उतने ही सरल और सहज थे।
​"लेखनी थमी है, विचार नहीं...
सांसें रुकी हैं, सरोकार नहीं।
आप देह से भले दूर हुए अमरनाथ भैया,
मगर यादों से होंगे कभी विदा नहीं"...
यादों की एक तस्वीर:-
यह कोचिन का समुद्र तट है, जहां 2005 में भारतीय नदी मंच के सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे। इस सम्मेलन में सुंदर लाल बहुगुणा, साहित्यकार स्व. महाप्रकाश, जस्टिस कृष्ण अय्यर व जस्टिस शमसुद्दीन भी आए थे..

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