​रजौन के दो सगे चचेरे भाई-बहन ने बीपीएससी में मारी बाजी, पहले ही प्रयास में बने अधिकारी

रजौन ,बांका :-बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के फाइनल रिजल्ट जारी होते ही बांका जिले के रजौन प्रखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। यहां के भवानीपुर-कठौन पंचायत के करसानी गांव में एक ही परिवार के दो चचेरे भाई-बहन ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। स्वर्गीय टेकनारायण महतो एवं स्वर्गीय प्रेमलता देवी के पोता गौरव कुमार सत्यार्थी और पोती कुमारी स्वयंप्रभा ने एक साथ इस कठिन परीक्षा को पास किया है, और दोनों का ही चयन ग्रामीण विकास अधिकारी (आरडीओ) के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है। इस दोहरी सफलता के बाद से ही उनके परिजनों, शिक्षक समुदाय और पूरे गांव-समाज में जश्न का माहौल है और घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस परीक्षा में 700वां रैंक हासिल करने वाले गौरव कुमार सत्यार्थी के माता-पिता, सत्यार्थी कुमार केशव और रेशमी कुमारी दोनों ही शिक्षक हैं। गौरव की शुरुआती शिक्षा बेहद शानदार रही है; उन्होंने साल 2013 में डीपीएस भागलपुर से 10वीं और 2015 में रांची के जेवीएम श्यामली से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता की प्रसिद्ध जाधवपुर यूनिवर्सिटी से बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई पूरी की और साल 2020 से इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन में सहायक प्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। गौरव ने इससे पहले वर्ष 2024 में देश की सबसे कठिन यूपीएससी की परीक्षा में इंटरव्यू राउंड तक का सफर तय किया था, जहां बेहद मामूली अंतर मात्र 6 अंक से चूकने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी क्रैक कर अपनी काबिलियत साबित कर दी। गौरव की इस सफलता के साथ-साथ उनके पूरे परिवार में हमेशा से ही शिक्षा का एक बेहतरीन माहौल रहा है। बता दें कि गौरव के बड़े पिताजी एवं स्वयंप्रभा के पिता जयशंकर प्रसाद विद्यार्थी भी पेशे से एक शिक्षक हैं। वहीं गौरव और स्वयंप्रभा के अपने छोटे चाचा कुंदन कुमार बिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय तेलिया के शिक्षक एवं बांका जिले के सांस्कृतिक कार्यक्रम समन्वयक सह उद्घोषक हैं, जबकि स्वयंप्रभा के बड़े भाई कुमार देवव्रत एवं भाभी रोमी कुमारी भी पेशे से बीपीएससी शिक्षक हैं। इसी समृद्ध शैक्षणिक माहौल से निकलकर परिवार की होनहार बेटी कुमारी स्वयंप्रभा ने भी इस परीक्षा में 1286वां रैंक प्राप्त कर आरडीओ-बीडीओ के पद पर अपनी जगह पक्की की है। स्वयंप्रभा ने साल 2014 में उच्च विद्यालय उपरामा से 10वीं और 2016 में डीएन सिंह कॉलेज भूसिया से 12वीं की। इसके बाद उन्होंने एसएम कॉलेज भागलपुर से साल 2019 में बॉटनी ऑनर्स के साथ बीएससी की और फिर साल 2022 में इसी कॉलेज से बीएड की डिग्री हासिल की। अपनी इसी शैक्षणिक योग्यता के दम पर उन्होंने बीपीएससी टीआरई 2.0 (शिक्षक बहाली परीक्षा) में सफलता पाई और वर्तमान में वे भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड के उच्च विद्यालय उधाडीह में कक्षा 9-10 की साइंस शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की व्यस्त जिम्मेदारी के बीच समय निकालकर उन्होंने बीपीएससी की तैयारी की और पहले ही चांस में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। एक ही परिवार के इन दोनों होनहारों ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो नौकरी के साथ भी पहली बार में बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

रिपोर्ट:- केआव राव 

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