रजौन, बांका : जुलाई महीने की शुरुआत होते ही रजौन प्रखंड के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। मानसून की बेरुखी और पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र में अभी से ही सूखे जैसे हालात पैदा होने लगे हैं। किसानों ने बेहद उम्मीद और मेहनत के साथ खेतों में धान का जो बिचड़ा डाला था, वह पानी के अभाव में अब सूख कर पीला पड़ने लगा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे खेतों की मिट्टी सूख कर फट गई है और उनमें बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि अमूमन जुलाई के महीने में रजौन और आसपास के इलाकों में अच्छी-खासी बारिश हो जाती थी, जिससे धान की रोपनी का काम जोर-शोर से शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार आसमान में सिर्फ बादल आते हैं और बिना बरसे ही निकल जाते हैं। एक तरफ जहां प्रकृति दगा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली आपूर्ति की स्थिति ने किसानों की रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। किसानों का आरोप है कि बिजली तो मिल रही है, लेकिन विभाग द्वारा कृषि फीडरों में 24 घंटे में महज 8 घंटे ही आपूर्ति दी जा रही है। इस नाकाफी बिजली और घटते जलस्तर के बीच किसान समरसेबल या मोटर पंप चलाकर भी अपने धान के बिचड़े को सूखे से बचाने में सफल नहीं होते दिख रहे हैं। निजी पंपसेटों के सहारे बिचड़े को बचाने की हर कोशिश नाकामी की कगार पर है; लगातार गिरते जलस्तर, भीषण गर्मी और कृषि फीडर में बिजली की सीमित आपूर्ति के कारण सरकारी व निजी प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण पम्पसेट और जनरेटर से पटवन का खर्च भी किसानों की जेब पर भारी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने रुपये कर्ज लेकर और कड़ी मेहनत से धान का बिचड़ा तैयार किया था ताकि समय पर रोपनी की जा सके, लेकिन बारिश नहीं होने और पर्याप्त बिजली न मिलने से बिचड़ा खेतों में ही दम तोड़ रहा है और खेत इस कदर फट गए हैं कि अब उनमें पानी टिकाना भी मुश्किल हो रहा है; अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई या बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो उनकी पूरी लागत डूब जाएगी और भुखमरी की नौबत आ जाएगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान के बिचड़े को एक निश्चित समय के भीतर ही खेतों में रोपना बेहद जरूरी होता है और यदि बिचड़ा अधिक दिनों का होकर खेतों में ही सूख गया, तो धान की पैदावार न के बराबर होगी। बारिश की इस भारी कमी और सिंचाई संसाधनों की इस किल्लत को देखते हुए रजौन के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। उन्होंने जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित इलाकों का तुरंत सर्वेक्षण कराया जाए, कृषि फीडर में बिजली की आपूर्ति की अवधि बढ़ाई जाए और क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करते हुए किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज या डीजल अनुदान की व्यवस्था की जाए।
बारिश न होने से धान का बिचड़ा सूखा, खेतों में पड़ रही दरारें
byकुमुद रंजन राव
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