"कभी भी हो सकती है अनहोनी-जा सकती है सैकड़ों बच्चों की जान"

चम्पारण नीति/बेतिया(पश्चिमी चम्पारण)  शिक्षा विभाग की उदासीनता व पदाधिकारियों की गैरजिम्मेदारी कभी भी ले सकती है करीब सैकड़ो छात्रों की जान ..... !
        
         बेतिया-मैनाटाँड मुख्यपथ में 16 वें कि.मी. पर स्थित बकुलहर चौक के समीप संचालित राजकीय प्राथमिक विद्यालय " हाता टोला " (कन्या) अंचल चनपटिया की भवन विगत कई सालों से जर्जर हो चकी है. विद्यालय के प्रधान शिक्षक म. ताहिर ने बताया कि यह विद्यालय भवन वर्ष 1986 में बना था । जिसकी समुचित रख-रखाव नही होने तथा घटिया निर्माण कार्य की वजह से करीब दस साल से विद्यालय का छत धीरे-धीरे अब जर्जर हो चुका है । जिसमें दो कमरे है और करीब 105 बच्चे नामांकित है। बारीश के समय छत से पानी तो टपकता ही है साथ ही छत से चट भी गिरते रहता है। ऐसी स्थिति में कई बच्चे व शिक्षक चोटिल हो चुके है। 
         ज्ञातव्य हो कि स्थानीय लोगों के अनुसार नये विद्यालय भवन निर्माण हेतु विभाग द्वारा राशि आवंटित हुई थी । लेकिन स्थानीय प्रधानाध्यापिका कुमारी गायत्री त्रिपाठी तथा अन्य प्रधानों ने जमीनी विवाद को लेकर नये विद्यालय भवन का निर्माण नही करा सके और भवन निर्माण की राशि वापस कर दी गई। वही कुछ स्थानीय लोगों ने अपनी तिखी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि ... इस विद्यालय मे गरीब व मजदूर परिवार के साधन-सुविधा विहीन बच्चे पढ़ते है इसलिए गाँव के साधन-सुविधा सम्पन्न एवं जानकार लोगों को कोई मतलब नही रहता है । इसलिए इस विद्यालय की यह दुर्दशा है। कई  लोग विद्यालय के लिए आवंटित जमीन को भी अतिक्रमित कर लिया है। वर्तमान प्रधानाध्यापक म. ताहिर ने कहा कि ..... निवर्तमान प्रधानाध्यापिका ने विद्यालय की इस जर्जर हालत से कई बार विभाग व वरीय अधिकारियों को मौखिक व पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया गया है फिर भी अब तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है ।
          अगर समय रहते इस विद्यालय के सैकड़ों बच्चों जान के साथ-साथ पढाई पर तत्काल विचार करते हुए आवश्यक कार्यवाही नही कि गई तो .... कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है और बच्चों सहित शिक्षकों की जान जा सकती है......




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