समेकित पोषक तत्व प्रबंधन: प्रशिक्षण संपन्न


चम्पारण नीति/बेतिया:-   कृषि विज्ञान केन्द्र, मधोपुर, में चल रहे 15 दिवसीय " समेकित पोषक तत्व प्रबंधन " (INM) विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ.
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि विज्ञान केन्द्र, नरकटियागंज के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर. पी. सिंह, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (DDM) श्री कामेश्वर सिंह एवं अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) श्री राजेन्द्र कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए और प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन किया।

इस अवसर पर केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि, "ये 15 दिन सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, बल्कि हमारी सोच को बदलने की यात्रा थी। पहले हम सोचते थे कि ज्यादा यूरिया, ज्यादा DAP डालने से ज्यादा पैदावार होगी, लेकिन इस सोच ने हमारी धरती माँ को बीमार बना दिया है. आज देश की 48% जमीन में जिंक, 33% में बोरॉन और 25% में सल्फर की कमी है।"

उन्होंने बताया कि जैसे एक बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए सिर्फ चावल नहीं, दाल, सब्जी, दूध, फल सब चाहिए, वैसे ही जमीन को भी संतुलित आहार चाहिए. INM का अर्थ है - जैविक + रासायनिक + जैव उर्वरकों का सही संगम.

जैविक खाद - जमीन की आत्मा: गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद ये जमीन में करोड़ों मित्र जीवाणुओं का घर हैं.

रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग: बिना जाँच के दवा नहीं, बिना मृदा परीक्षण के खाद नहीं और हमेशा नीम लेपित यूरिया का प्रयोग करें।

जैव उर्वरक - खेत के मुफ्त मजदूर: राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, PSB, KMB हवा से नाइट्रोजन लेकर पौधों को देते हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: पराली को जलाना नहीं, खेत में ही मिलाना है।

डॉ. सिंह ने बताया कि इस तकनीक से तीन बड़े लाभ होंगे - लागत में 25-30% की कमी, 2-3 साल में उत्पादन में 15-20% की वृद्धि और जमीन अगले 20 साल तक स्वस्थ बनी रहेगी।
अंत में उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि आप सभी यहाँ से सिर्फ प्रमाण-पत्र लेकर नहीं, बल्कि "मृदा डॉक्टर" की जिम्मेदारी लेकर जा रहे हैं। केंद्र के फसल उत्पादन के वैज्ञानिक डॉ हर्षा बी आर ने बताया कि प्रत्येक किसान कम से कम 10 किसानों को गोबर न जलाने, हर साल मिट्टी जाँच कराने और घर पर वर्मी कम्पोस्ट बेड लगाने के लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। 

हमारा लक्ष्य - स्वस्थ मृदा, समृद्ध किसान और खुशहाल भारत।

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