बांका: चांदन प्रखंड मुख्यालय के बगल स्थित बिरनिया पंचायत का सुपाहा औऱ उत्तर सुपाहा के करीब 70 से 80 परिवार के करीब 600 की आबादी के लोगों को पूरे बरसात भर नरकीय जीवन बिताना पड़ता हैं सभी आम लोगो को कीचड़युक्त गली से आना जाना पड़ता हैं। इसी कीचड़ भरे रास्ते से जानवरो को भी गांव से बाहर ले जाना पड़ता हैं। जबकि गांव से बाहर मुख्यालय,बाजार, स्कूल,आंगनवाड़ी केंद्र,आने जाने का एक मात्र रास्ता यही हैं।इस रास्ते पर किसी भी छोटे, बड़े वाहन का तो दूर चप्पल जूते पहन कर कोई भी आ जा नही सकता हैं। इस कीचड़युक्त और फिसलन वाले रास्ते के कारण छोटे छोटे बच्चे स्कूल तक नहीं जाते हैं। जबकि स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि,विधायक,सांसद सभी ग्रामीणों की इस दुर्दशा से न सिर्फ वाकिफ हैं बल्कि ग्रामीणों द्वारा इससे छुटकारा दिलाने की मांग भी कर चुके हैं। और सभी ने सिर्फ आश्वासन भर दिया हैं। बारिश के बाद सड़क सुख जाती हैं और चलने फिरने के लायक होने के कारण सभी अपने वायदे को भूल जाते हैं।जबकि हर बर्ष यही समस्या ग्रामीणों के सामने बरकरार होती हैं। सुपाहा गांव के ललन पंडित, अजित कुमार,गौतम पंडित, जबकि उत्तरी सुपाहा के गांधी पंड़ित, अशोक पंडित,बबलू पंडित सहित दर्जन भर ग्रामीण कहते हैं कि इस समस्या पर किसी ने आज तक कोई ध्यान नही दिया। जिससे आजादी के इतने दिन बाद भी हम लोगो को एक सड़क तक नही मिल सकी हैं।पता नही अब हमारी मांग कब पूरी होगी।
बिरनिया पंचायत के सुपाहा गांव को नहीं है सड़क,कीचड़ से स्कूल नहीं जाते बच्चे
byआमोद कुमार दुबे
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