रजौन में डेढ़ दशक से आधे-अधूरे पड़े हैं 16 आंगनबाड़ी केंद्र, राशि निकासी के बावजूद काम अधूरा

रजौन,बांका :-प्रखंड क्षेत्र में नौनिहालों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था संवेदकों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुकी है। रजौन प्रखंड के 16 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण कार्य करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय से आज तक आधा-अधूरा लटका हुआ है। इसमें चिलकावर-असौता पंचायत का केंद्र संख्या 44 असौता, मझगांय-डरपा के केंद्र संख्या 72 चकवीर-1 व केंद्र संख्या 181 रहीमडीह-2, संझा-श्यामपुर के केंद्र संख्या 80 रैयपुरा, केंद्र संख्या 83 झुरखुरिया व केंद्र संख्या 190 संझा-2, हरचंडी-अमहारा के केंद्र संख्या 90 अमहारा-1, केंद्र संख्या 94 मीरनगर-1, केंद्र संख्या 95 बलथारा-1, केंद्र संख्या 137 अमहारा-2 व केंद्र संख्या 138 बलथारा-2, भवानीपुर-कठौन का केंद्र संख्या 155 लीलातरी, तिलकपुर के केंद्र संख्या 166 सैदपुर-सिंगरपुर व केंद्र संख्या 219 नीमा-2, सकहारा पंचायत का केंद्र संख्या 194 खजूरकोरामा-2 और खैरा पंचायत का केंद्र संख्या 199 खैरा-3 शामिल हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि विभागीय स्तर पर निर्माण कार्य की पूरी राशि निकासी कर लिए जाने के बावजूद धरातल पर भवनों को आधा-अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे आज तक इन सरकारी इमारतों का कोई उपयोग नहीं हो सका। वहीं दूसरी तरफ सकहारा पंचायत के वार्ड संख्या 14 विष्णुपुर गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 110 का सरकारी भवन पूरी तरह जर्जर और खस्ताहाल हो चुका है, जिसके चलते किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए बीते 3 सितंबर 2024 से ही सेविका व सहायिका इस केंद्र को अन्यत्र अपने निजी घर पर संचालित करने को मजबूर हैं। ​प्रखंड में अपने सुरक्षित पक्के भवनों के अभाव और कई केंद्रों की जर्जर हालत के कारण सेविकाओं को लाचारी में अपने घरों या किराए की तंग जगहों पर केंद्र चलाना पड़ रहा है। वर्तमान में बरसात के मौसम के कारण टपकती छतों और सीलन भरे संकीर्ण कमरों में नौनिहालों को बैठाने से सेविका-सहायिकाओं के साथ-साथ मासूम बच्चों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति और उनके पोषण पर पड़ रहा है। डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने और सरकारी धन की निकासी के बावजूद इन आधे-अधूरे व जर्जर भवनों की सुध न तो स्थानीय प्रशासन ले रहा है और न ही जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर कोई ध्यान दे रहे हैं। इस मुद्दे को पंचायत समिति की बैठकों में भी पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से जोरदार तरीके से उठाया जाता रहा है। ​इधर संझा-श्यामपुर पंचायत के बलराम कुमार यादव एवं कुंदन कुमार मिश्रा सहित अन्य ग्रामीणों ने अपने पंचायत के तीनों अर्धनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावे प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के अर्धनिर्मित भवन को जल्द पूरा कराने तथा जर्जर व क्षतिग्रस्त भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने बांका जिला प्रशासन से सरकारी राशि के गबन की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी संवेदकों व संबंधित कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा सभी केंद्रों के लिए अविलंब सुरक्षित व पक्के भवन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। वहीं इस मामले को लेकर रजौन सीडीपीओ चंचला कुमारी ने बताया कि महिला पर्यवेक्षिकाओं के माध्यम से प्रखंड के सभी जर्जर, आधे-अधूरे तथा पूर्ण व अपूर्ण आंगनबाड़ी केंद्रों की सूची तैयार करवाई जा रही है, जिसे तैयार होते ही एक सप्ताह के भीतर अग्रतर कार्रवाई के लिए जिला मुख्यालय को उपलब्ध करा दिया जाएगा।

रिपोर्ट:- केआर राव 

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