रजौन, बांका : बिहार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रजौन शाखा के बैंकर्स टीम पुलिस के साथ वारंट धारी ऋण धारकों से ऋण वसूली के लिए खैरा पंचायत के खिड्डी गांव पहुंची थी । इस दौरान वारंट निलेश कुमार सिंह पिता जवाहर प्रसाद सिंह के नाम से जारी था जबकि बैंकर्स व पुलिस टीम ने निलेश कुमार सिंह पिता विनोद कुमार सिंह खिड्डी के घर पर पहुंचकर लोन चुकाने को लेकर सख्ती बरतने लगी। टीम निर्दोष किसान निलेश कुमार सिंह को कस्टडी में लेकर जाने की बात कहने लगे। परिजन व किसान कहता रहा कि हमारा वारंट नहीं है क्योंकि हमें कभी भी कोई नोटिस नहीं मिला है। लेकिन पुलिस लेकर पहुंची बैंकर्स की टीम करीब एक घंटे तक अपने कस्टडी में किसान को रखा व दुर्व्यवहार करते रहा। शोरगुल पर ग्रामीण एकत्रित हो गए व वारंट कंफर्म करने की बात करने लगे। किसान के बार-बार कहने पर कि हमारा लोन नहीं है आप एक बार ब्रांच से कंफर्म हो लीजिए । रिकवरी टीम 50 हजार जमा करने पर ही छूट देने पर अडी रही। पुनः किसान ने रजौन से भाई द्वारा पैसे लेकर देने की बात कहने पर रूके। लोन रिकवरी टीम ने एक भी ना सुनी जब किसान के परिजन ने मजबूर होकर 21 हजार जमा किए तब जाकर किसान को आजाद किया गया। यह कहते हुए कि आज के डेट में ही 50 हजार आप बैंक में जमा कीजिए। किसान के पास 21 हजार का प्राप्ति रसीद भी काटा गया। इस तरह की गलतफहमी पर किसान के परिजन जब ग्रामीण बैंक रजौन की शाखा में पहुंचकर तहकीकात किये तो पता चला कि यह वारंट दूसरे के नाम पर निकला हुआ था । रिकवरी टीम बगैर पहचान के ऐसा कर रहे थे। जबकि रिकवरी लिस्ट में साफ लिखा था निलेश कुमार सिंह पिता जवाहर प्रसाद सिंह गांव खिड्डी। हालांकि ब्रांच मैनेजर ने अपने केबिन में ही अपने सूझबूझ के तहत मौखिक रूप से 21 हजार लौटा कर मामला रफा दफा करने का प्रयास किया। सवाल यह उठता है कि आखिर उस टीम में कई पदाधिकारी हैं और पढ़े लिखे लोग बावजूद भी इस तरह का दुर्व्यवहार व परेशान करना कहां तक उचित है । पीडित किसान ने जिलाधिकारी व उच्च अधिकारियों से इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो ऐसी टीम पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है । आगे परिजनों ने बताया कि किसी निर्दोष के घर में 10-12 की संख्या में पुलिस के साथ बेवजह हर एक रूम की तलाशी लेना घर का फोटो एवं वीडियो ग्राफी करना किसी के भी मान सम्मान पर आंच है । जब पता चला कि किसान निर्दोष है तो सभी रिकवरी टीम के होश उड़ गए।
इन दिनों बैंक के द्वारा इस तरह के बिना पहचान के लोगों को वारंट का भय दिखाकर दुर्व्यवहार से किसान मजदूर परिवार भयभीत व खासे चिंतित हैं । एलडीएम रंजय कुमार ने कहा कि बगैर पहचान निर्दोष किसान से दुर्व्यवहार नहीं करनी चाहिए। मामले की जांच की जायेगी।
रिपोर्ट:- केआर राव