चम्पारण नीति/मझौलिया(प.चम्पारण) आधुनिक समय की मांग है गौ-पालन, समेकित कृषि प्रणाली को मिलेगा बढ़ावा .... !
वर्तमान समय में रसायनिक खेती से बढ़ती लागत और घटती उर्वरता के बीच गौ-पालन एक बार फिर से कृषि की रीढ़ बनता जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र, मधोपुर, पश्चिमी चम्पारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह पर बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र, मधोपुर द्वारा समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें गौ-पालन को विशेष महत्व दिया जा रहा है जिसे अपनाकर स्वरोजगार की तरफ अग्रसर हो सकते हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन, माधोपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि समेकित कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ-साथ गौ-पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। फसल उत्पादन के वैज्ञानिक डॉ. हर्षा बी. आर. ने बताया कि गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट न केवल खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं, बल्कि खेती की लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। उन्होंने बताया कि समेकित कृषि मॉडल में भारतीय नस्ल की गायों के पालन पर विशेष महत्व दिया गया है। एक गाय से प्राप्त गोबर-गोमूत्र से एक एकड़ खेत में आसानी से जैविक खेती की जा सकती है। इससे दूध उत्पादन से नियमित आय, बछड़ों से अतिरिक्त लाभ और गोबर से जैविक खाद का चक्र पूरा होता है। केन्द्र पर आए किसानों ने प्रत्यक्षण इकाइयों का भ्रमण कर गौ-आधारित समेकित कृषि की बारीकियों को समझा। कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ. चेलपुरी रामलू ने कहा कि आधुनिक समय में जब बाजार में शुद्ध दूध, घी और जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, तब गौ-पालन किसानों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर बहुअरवा ग्राम के मुखिया श्री देवी सहनी सहित दर्जनों किसान एवं केन्द्र के श्री विनीत कुमार, मनोज कुमार, शंभू कुमार, कमलेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार चौधरी आदि उपस्थित थे।