बांका: कोरोना काल के दिवाली में जहां आम लोग चीनी सामानों को छोड़कर कुंभ कारों के मिट्टी के बने दीपक और अन्य सामानों की खरीदारी अधिक करते दिखे, वहीं बाजारों में धनतेरस में बर्तन गहने और दिवाली के दिन पटाखों की बिक्री काफी कम हुई। जिससे दुकानदारों में काफी निराशा रही। जबकि कुंभ कारों के घर कई वर्षों के बाद खुशी की दीपावली देखने को मिली। आम लोगों की माने तो चीनी सामानों की बिक्री इस वर्ष बाजारों में बांका, कटोरिया, बेलहर, धोरैया, रजौन, चांदन, कटोरिया, बाराहाट सहित अन्य बाजारों में काफी कम हुई। और ऐसे दुकानदार जो बड़ी संख्या में चीनी सामान को लाकर बेचने की तैयारी में थे, उन्हें काफी निराशा हुई। जबकि कुम्हकारो द्वारा इस बर्ष बड़ी संख्या में दीपक और मिट्टी के बर्तन तैयार किए गए थे। जिसकी बिक्री आशा से अधिक हुई। दीपक बेचने वाले बीजों पंडित, सुखदेव पंडित, सरिता देवी, गौतम पंडित, ने बताया कि इस वर्ष काफी दिनों के बाद मिट्टी के दीपक की बिक्री बहुत अधिक हुई। जिससे उनके परिवार में खुशी लौट आई है। जबकि पटाखे की बिक्री और धनतेरस के सामानों की तैयारी के बावजूद उसकी बिक्री कई सालों का सबसे कम रहा।
माना जाता है कि कोरोना काल में आय का स्रोत पूरी तरह समाप्त हो जाने, और अधिकतर बाहरी कामगारों के अपने अपने गांव में रहने के कारण ऐसी स्थिति बनी और लोग अधिक राशि की सामग्री खरीदने में असमर्थ दिखे।

