(वेबाक और वरिष्ठ पत्रकार अनुरंंजन झा)
कोई भी सामान बनाने वाली कंपनी में काम करने वाला कंपनी और मालिकान के हित को ध्यान में रखते हुए काम करता है। कोई सरकारी बाबू सरकारी नीतियों के खिलाफ जाकर कोई फैसला नहीं कर सकता है, फिर आप ये उम्मीद क्यूं करते हैं कि #मीडिया में काम करने वाले आपके हित की बात करेंगे ? आप कुछ देते हैं क्या उनको ? सीधे आरोप मढ़ दिया कि मीडिया दलाल है फिर तो जूते की फैक्ट्री से लेकर आपकी रोजमर्रा की चीजों को पैदा करने वाली कंपनी में काम करने वाला भी दलाल ही हुआ न ? दरअसल इस देश की जनता ही खुद की दलाल है जो दूसरों के पैसे पर अपना फायदा चाहती है। सोचिए वो मीडिया हाउस एक कंपनी है, लाखों-करोड़ों का खर्च आता है, सैकड़ों-हजारों लोगों का परिवार चलता है और उसमें आपका एक धेला भी खर्च नहीं होता फिर किस मुंह से आरोप लगाते हैं। मीडिया गोदी नहीं ये मीडिया #रोगीमीडिया है इसका इलाज करना होगा और वो तभी संभव है जब आप अपनी जेब ढीली करेंगे। आपके चंदे पर खड़ा हुआ संस्थान ही आपकी बात करेगा, जिसके पैसे पर संस्थान खड़ा होता है उसी की बात करता है, आपके आरोप लगाने से उसपर कोई फर्क नहीं पड़ता .... सोचिए #हूंबोहूंबो करने से नहीं चलेगा। ... धान के खेत से गेहूं निकालिए ...
(फेसबुक पेज से)
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