बांका (रजौन):बिहार सरकार द्वारा कतरनी धान की खेती के लिए उपयुक्त जगह रजौन प्रखंड अंतर्गत सिंहनान एवं मझगांय -डरपा पंचायत के दो सौ एकड़ कृषि योग्य जमीन पर खेती करने का लक्ष्य इस मानसून सत्र में रखा गया है।इसको लेकर जिला पदाधिकारी सुहर्ष भगत ने बुधवार को मझगांय गांव पहुंचकर किसानों से अद्दतन जानकारी लेने के उपरांत चांदन नदी तटबंध का भी कई स्थानों पर पहुंचकर जायजा लिए।डीएम ने स्थानीय पत्रकारों से बातचीत के क्रम में पराली जलाने की समस्याओं से अवगत हुए।विदित हो कि एक अप्रैल को बामदेव-चकपरासी -लकड़ा सड़क मार्ग के किनारे कुछ किसानों द्वारा कई एकड़ जमीन पर गेहूं के अवशेष यानी पराली को व्यापक पैमाने पर जला कर नष्ट कर दिया गया था।यहां तक नवादा खरौनी पंचायत अंतर्गत रानीटीकर-नवादा सड़क मार्ग स्थित गोसाईंचक गांव के किसान निलेश कुमार द्वारा हार्वेस्टर से गेहूं कटाई के उपरांत फसल अवशेष यानी पराली में तीन अप्रैल की दोपहर करीब एक बजे आग के हवाले कर दिया गया था।आग की चिंगारी वृहत पैमाने पर हवा के झोंके के बीच लगने से गोसाईं चक,दर्जीकित्ता व नवादा गांवों के करीब एक दर्जन किसानों के 10 एकड़ से भी अधिक खेत में लगे गेहूं का फसल जलकर राख हो गया था।इस मामले में कृषि विभाग द्वारा अब तक सिर्फ खानापूर्ति के रूप में प्रखंड कृषि समन्वयक उदय कुमार सिंह के बयान पर नवादा थाने में फसल अवशेष पराली जलाने वाले किसान निलेश कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज कराई गई है।ज्ञात हो गत वर्ष 2020 में भी गोसाईंचक् गांव के किसान कौशल सिंह एवं संजय कुमार सिंह के विरुद्ध नवादा थाने में रबी फसल अवशेष पराली जलाने के आरोप में मामला दर्ज कराई गई थी। बताया जा रहा है स्थानीय किसान सलाहकार के मिलीभगत से पराली जलाने वाले का बचाव कर दिया जाता रहा है,जिस कारण किसान जानकारी के अभाव में रबी फसल अवशेष पराली को जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।वहीं,डीएम सुहर्ष भगत ने रबी फसल अवशेष पराली जलाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पराली जलाने वाले किसानों को बचाने वाले कृषि विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई का भी संकेत दिए हैं।डीएम की आने की सूचना की भनक पर स्थानीय पुलिस प्रशासन काफी सजग दिख रहे थे।इस मौके पर बीडीओ गुरुदेव प्रसाद गुप्ता,सीओ निलेश कुमार चौरसिया,पुलिस इंस्पेक्टर राजेश कुमार,थानाध्यक्ष बुद्धदेव पासवान,अपर थानाध्यक्ष रामविचार सिंह जगह-जगह पेट्रोलिंग कैंप करते हुए गश्त लगा रहे थे।
रिपोर्ट: कुमुद रंजन राव