पराली जलाने से वायु प्रदूषण फैलने की आशंका बढ़ी

 
बांका(रजौन): प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में रवि फसल कटाई के बाद खेत में पड़े रहे अवशेष पराली जलाने का सिलसिला युद्ध स्तर पर जारी है।सरकार द्वारा पराली जलाने पर प्रतिबंध किए जाने के बाद भी किसानों द्वारा रवि फसल के अवशेष पराली को जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस कारण ग्रामीण इलाके में व्यापक पैमाने पर पराली जलाने को लेकर वायुमंडल का वातावरण प्रदूषित होते जा रहा है।वही आग के लपेट के कारण जले हुए पराली स्थान के इर्द-गिर्द रवि फसल जो खेत में पड़ा हुआ है उसे भी नुकसान होने की पूर्ण संभावना बनती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजावर - नवादा सड़क मार्ग स्थित नीमा एवं बामदेव लकड़ा सड़क मार्ग पर व्यापक पैमाने पर दिन रात आग की लपेट को देखा जा सकता है। पराली का आग इतना बृहद पैमाने पर फलते जा रहा है। कभी भी अप्रिय घटना भी हो सकता है।पराली जलते रहने को लेकर दक्षिण से चारा की खोज में आए दखनाहा को चारा पानी की तलाश में दर दर भटकते हुए मवेशियों को देखा जा रहा है।व्यापक पैमाने पर ग्रामीण इलाकों में किसानों द्वारा पराली जलाने को लेकर बांका केवीके वरीय वैज्ञानी सह प्रधान डॉ.मुनेश्वर प्रसाद एवं जिला कृषि पदाधिकारी विष्णु देव कुमार रंजन ने बताया पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई के लिए बीएओ मु.सेराज को जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। जांच में सही पाए जाने पर पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी तरह का कृषि से संबंधित अनुदान एवं इनपुट से वंचित करने की कार्रवाई की जाएगी।केवीके प्रधान वरीय विज्ञानी एवं डीएओ ने बताया पराली जलाना अपराध के श्रेणी में आता है।इस स्थिति में जांच उपरांत पराली जलाने बाले किसानों के विरुद्ध थाने में मामला भी दर्ज करवाई जाएगी।बताया जा रहा है किसान सलाहकार स्थानीय होने के नाते पराली जलाने वाले किसानों पर जानबूझकर बचाव कर देता है। इस कारण जानकारी के अभाव में किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे है।
रिपोर्ट :कुमुद रंजन राव

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