बांका (धोरैया): बांका जिले के धोरैया में आदिवासी बस्ती कुशवाहा गांव के प्रधान की गिरफ्तारी के बाद लड़की बासमती और लड़का अरविंद कुमार की शादी रोक दिया गया है।पत्नी पत्नी के रूप में गांव आने के बाद भी तीन दिनों से दोनो को गांव के बाहर ही रहने पर मजबूर कर दिया गया है। दोनो की शादी आदिवासी समुदाय के रीति रिवाज के विपरीत मान कर समाज ने यह कदम उठाया है। ग्रामीण राहुल सोरेन का कहना है कि आदिवासी समाज का नियम है कि शादी गांव के प्रधान ही कराते हैं। बिना उसकी उपस्थिति की शादी हो ही नहीं सकती। सोमवार रात को कुसाहा ग्राम निवासी रसिकलाल मुर्मू की बेटी बासमती की शादी थी। इसी दौरान पुलिस ने गांव पहुंचकर प्रधान गोपाल सोरेन के घर छापामारी किया। और प्रधान के घर से शराब बरामद होने के कारण उसे जेल भेज दिया गया। पहले तो ग्रामीणों ने प्रधान को छुड़ाने का भी काफी प्रयास किया, लेकिन पुलिस उसे छोड़ने से साफ इंकार कर गई। इससे शादी रुकने के बाद मंगलवार को भी बारात लौट गई। लेकिन आदिवासी समुदाय में बारात लौटने के कारण लड़की को विधवा घोषित कर दिया जाता है।और उसकी दूसरी जगह शादी नही होती है। इसलिए बिना शादी दूल्हा दुल्हन के आने की जानकारी जब ग्रामीणों को मिली तो सभी एक साथ होकर गांव के बाहर सीमा पर ही उन्हें रोक दिया। अब मामला प्रधान की रिहाई तक शादी नहीं होने पर अटकी हुई है। तब तक दूल्हा-दुल्हन गांव के बाहर ही रहेंगे। वही ग्रामीण का कहना है कि आदिवासी की शादी बिना शराब के नहीं होती है। और उसी शादी के लिए प्रधान द्वारा शराब रखा गया था। लेकिन पुलिस को किसी ने गलत सूचना देकर प्रधान को गिरफ्तार करवा दिया। जिससे आदिवासी समाज की शादी रोक दी गई।
प्रधान की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी की शादी रुक गयी
byआमोद कुमार दुबे
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