साक्षी भारद्वाज ने घर को बनाया मिनी जंगल, नाम दिया “जंगलवास”


साढ़े आठ सौ स्क्वेयर फिट में चार हजार से ज्यादा प्रजाति के पेड़-पौधे

ओमएजी बुक ऑफ रिकार्ड ने राष्ट्रीय रिकार्ड के रुप में किया दर्ज

फ्लोरिडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपिंस के 150 विलुप्त प्रजाति के हैं पेड़-पौधे 

भोपाल - क्या आप सोच सकते हैं कि सिर्फ साढ़े आठ सौ स्केवयर फिट में चार हजार से ज्यादा प्रजाति के पेड़-पौधे कोई लगा सकता है । यदि आपको जानकर और सुनकर आश्चर्य हो रहा है तो चलिए हम आपको मिलवाते हैं एक ऐसी पर्यावरण प्रेमी युवती से जिसकी इसी खूबी के चलते इनका नाम ओमएजी बुक ऑफ रिकार्ड ने राष्ट्रीय रिकार्ड के रुप में दर्ज किया है । जी हां इस युवती का नाम है साक्षी भारद्वाज । यदि आप साक्षी के घर जाएंगे तो देखकर चौंक जाएंगे कि ये घर या जंगल । जब घर ही जंगल जैसे लग रहा है तो फिर इसका नाम भी साक्षी ने कुछ ऐसा ही रखा है जैसा आप सोच रहे होंगे। जी हां इस गार्डन का नाम है जंगलवास । इस जंगलवास में लगभग चार हजार पेड़-पौधे घर के बाहर और कुछ तो घर के अंदर भी लगे हुए हैं । जैसे मां एक बच्चे की देखभाल करती है, वैसे ही साक्षी इनकी देखभाल बच्चों की तरह करती हैं । वे कहती हैं कि पेड़-पौधों में भी जान होती है और ये स्पर्श को भलीभांति समझते है । साक्षी साक्षी भाव से कहती हैं इनकी साफ-सफाई, कांट-छांट में प्रेम और स्नेह के भाव का होना बहुत जरुरी है, यदि कोई इन बातों का ध्यान नहीं रखता है, तो पेड़-पौधे उस तरह से नहीं बढ़ पाते जैसे बढ़ना चाहिए । या फिर वे सूख जाते हैं । 

एक पौधा आठ हजार का तो कुछ को विदेश से मंगवाने के लिए लाइसेंस लगता है 

साक्षी ने बताया कि उनके पास इन पेड़-पौधों में से 150 प्रजाति के वे पेड़-पौधे हैं जो रेयर हैं यानी विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार हैं । विश्व के सबसे बढ़े जंगल अमेजन से लेकर फ्लोरिडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपिंस, आदि कई देशों से पर्यावरण प्रेमी साक्षी ने इन पेड़-पौधों को अपने घर में बच्चों की तरह सहेजकर व संभालकर रखा है । आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इनमें से एक विशेष पौधा आठ हजार रुपए का है । साक्षी ने बताया कि वैरीगेटेड मोस्टेरा डेलीगोसिया, अमेजन रेड फारेस्ट है, इसकी खासियत ये है कि इसमें सबसे ज्यादा आक्सीजन होती है । ये एक बेल टाइप क्रिपर है जो आक्सीजन के लिए बहुत लाभदायी है । यदि हम भारत की बात करें तो देश भर से विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधे साक्षी के पास हैं। हिमाचल प्रदेश के जंगलों से लेकर इरनाकुलम, त्रिसूर नागालैंड और भी दर्जनों प्रदेशों और शहरों से साक्षी ने इनकों मंगवाया है । कुछ पेड़-पौधे तो ऐसे हैं कि जिन्हें विदेश से मंगाने के लिए लाइसेंस की जरुरत पड़ती है । 


नारियल के खोल का बनाया गमला, सामान्य गमलों से सिर्फ आधे पानी की खपत 

साक्षी के छोटे पौधों के लिए खासतौर पर नारियल के खोल बनवाए हैं । उनका कहना है कि नारियल पानी बचाता है जहां किसी पौधे को सामान्य गमले में 4 लीटर पानी की जरुरत होती है तो वहां नारियल में 2 लीटर ही काफी है। उन्होंने बताया कि नारियल पोषण तत्व देता है। इसके साथ ही यह इकोफैंडली भी है। 

केछुएं के माध्यम से घर में ही आर्गेनिक खाद का निर्माण

साक्षी ने बताया कि किचन से जो भी वेस्ट मटेरियल निकलता है उसका उपयोग वे खाद बनाने में करती हैं । किचन वेस्ट कम्पोस्ट का हो जाता है । बर्मी कम्पोस्ट यानी केंचुए की खाद घर में ही बना ली जाती है जिससे जंगलवाल के पेड़-पौधों को नया जीवन मिल जाता है । साक्षी का कहना है कि केछुएं के माध्यम से आर्गेनिक खाद का निर्माण रासायनिक खाद से बहुत बेहतर है । उन्होंने कहा कि हमें धरती माता के लिए इकोफ्रैंडली होना चाहिए और आर्गेनिक खाद को बढ़ावा देना चाहिए ।

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