बांका (चांदन):सावन में कांवरिया को झारखंड प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश के बाद बांका जिला प्रशासन द्वारा सभी रास्ते पर दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।प्रखंड के पक्की सड़क की दर्दमारा सीमा के साथ भनरा औऱ कांवरिया पथ के दुम्मा सीमा पर भी यह व्यवस्था की गई है।लेकिन शिव भक्तों की आस्था किसी भी रूप में कम नही हो रही है। सावन के पहले ही दिन रविवार को कांवरिया पथ पर कई जगह जहां पैदल कांवरिया का जत्था किसी न किसी प्रकार देवघर में प्रवेश कर रहे है। जबकि सड़क मार्ग से छोटे बड़े वाहन से आने वाले भक्तों की संख्या भी कम नही है। पटनिया धर्मशाला के पास एक दुकान में अपना जल रख कर आराम फरमा रहे बंगाल के मुर्शिदाबाद निवासी जयनाथ भाष्कर,नीरज घोष,मनोज घोष,सुमन भाष्कर,मनोज चटर्जी,ने बताया कि हम लोगो की मनोती है औऱ हर बर्ष बाबा को जल चढ़ाते है।दो साल से यह बन्द होने के बाबजूद हम लोग गंगाधाम से जल लेकर आये है।अगर मंदिर नही जा सके तो देवघर के किसी मंदिर में पूजा कर शेष जल लेकर अपने घर चले जाएंगे।औऱ जब भी मंदिर में प्रवेश मिलेगा हर बर्ष का जल लाकर बाबा को चढ़ा देगे। देवघर जाकर ही हमे संतुष्टि मिल जाती है। वही आसाम धर्मशाला हड़खाड़ कांवरिया पथ पर सुल्तानगंज निवासी नन्दलाल यादव और मोती प्रसाद यादव ने पूछने पर बताया कि बाबा के बुलावे पर ही हमलोग देवघर जा रहे है।जहां तक संभव होगा जाकर अंतिम पड़ाव पर जलार्पण कर बाबा को प्रणाम कर वापस आ जाएंगे। वहीं दूसरी ओर वाहन से आने वाले कांवरिया भी झारखंड सीमा से पहले बिहार के किसी दुकान में ही कम लागत वाली हवाई चप्पल खरीद कर उसे पहनते हैं और अपना कांवरिया का वेश बदलकर पैदल सीमा पार कर जाते हैं। एक पूर्णिया के कांवरिया मनोज गोस्वामी ने बताया कि कांवरिया के वेश में पुलिस उन्हें रोकती है। इसीलिए मुंह पर मास्क और पैर में चप्पल पहन कर झारखंड सीमा में प्रवेश करने के बाद बाबा मंदिर का दर्शन कर वापस चले जाएंगे। बिना कांवरिया वेश और पैरों में चप्पल देख कर सीमा पर उसे नहीं रोका जाता है।
