रजौन(बांका) : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को मिलने वाली पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर बाल विकास परियोजना के अधिकारियों तक भेंट चढ़कर रह गई है ।सरकार ने केंद्र के बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन ये योजनाएं धरातल पर नहीं दिखाई पड़ रही है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक योजना है बाल विकास परियोजना जिसके तहत नौनिहालों को कई योजनाएं आवंटित किए जाते हैं।इस योजना के तहत भी नौनिहालों, गर्भवती महिलाओं,गर्भ धात्री महिलाओं एवं किशोरियों के लिए पोषाहार,अन्नप्राशन,गोद भराई जैसी योजनाओं के साथ अन्य योजनाओं के तहत नौनिहालों के लिए पोशाक योजना भी शामिल है।आए दिन आंगनवाड़ी केंद्र से सबसे ज्यादा शिकायतें देखने को मिल रही है।वहीं कुछ आंगनवाड़ी केंद्र पर ऐसी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाती है। ऐसे केंद्रों पर पैसे रहने के बावजूद लाभुकों को सुविधा नहीं मिलती है।प्रखंड क्षेत्र में 244 में से 240 आंगनवाड़ी केंद्र धरातल पर कार्यरत हैं। जिनमें मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 19 है तथा बड़े आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 221 है। बड़े केंद्रों पर 40, मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों पर 20 बच्चों,आठ गर्भवती महिलाओं, आठ गर्भवती धात्री एवं आठ किशोरियों को पोषाहार मिलने का प्रावधान है।इन केंद्रों में बड़े आंगनवाड़ी केंद्रों पर अभी वर्तमान में 20 हजार के स्थान पर 11 चार सौ एवं मिनी केंद्रों के लिए पांच हजार सात सौ रुपये कोरोना काल में प्रति केंद्र दिए जाते हैं,लेकिन इन केंद्रों को मिले पैसे में भी और अनियमितता का खेल खेला जाता है।नाम नहीं छापने की शर्त पर सेविकाओं ने दबी जुबान से बताया है कि पोषाहार,अन्नप्राशन,गोद भराई एवं किशोरियों को मिलने वाले लाभ में से एक निश्चित लाभ चढ़ावे के रूप में कार्यालय को वापस देनी होती है।अब बचे हुए रकम से ही सामान खरीद कर लाभुकों के बीच बांटना पड़ता है। इस स्थिति में लाभुकों को मिलने वाली पोषाहार एवं अन्य योजनाओं में कटौती करनी पड़ती है।सरकार द्वारा प्रति केंद्र 40 दूध के पैकेट में से आधा मिलत है। वहीं एक अन्य सेविका ने कहा कि योजनाओं में मिलने वाले पैसे में कार्यालय के दलालों के माध्यम से एक निश्चित रकम देनी होती है जो दो से चार हजार रुपये तक लिए जाते रहे है।उन्हें कार्यालय द्वारा कहा जाता है कि इनमें से एक निश्चित राशि निचे से ऊपर तक देनी पड़ती है ।इसलिए यह पैसा हम आप लोगों से ले रहे हैं। इस कोरोना महामारी में गरीब परिवारों के बीच घर चलाना मुश्किल हो जाया पड़ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार खैरा पंचायत के वार्ड नंबर 12 में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या दो पर विगत माह से पोषाहार का वितरण नहीं किए जाने की शिकायत जिसको लाभुकों द्वारा बाल विकास परियोजना कार्यालय में आवेदन देकर कार्रवाई करने की मांग की गई थी।अब ऐसे में कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं,गर्भ धात्री महिलाओं एवं किशोरियों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार आंगनबाड़ी केंद्र उपलब्ध कराने में विफल है।
इस संबंध में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया कि पैसा लेने का आरोप सरासर सत्य से परे बेबुनियाद है।जून माह से पोषाहार कार्यक्रम फंड पर जिला प्रशासन द्वारा रोक लगा दिया गया है।
रिपोर्ट:केआर राव