पौराणिक मंदार की चोटी अब नहीं रही दुर्गम,रोप-वे पर सवार होकर मिनटों में सैलानी करेंगे मंदार का दीदार

बांका : जिले के बौंसी एवं बाराहाट प्रखंड के केंद्र बिंदु पर प्राचीन वालीसा नगरी (बौंसी कस्बे) से उत्तर करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित मंदार पर्वत पर आज भी सैकड़ों पौराणिक चिह्न और धरोहर मौजूद हैं, जो इसके पौराणिक महत्व की पुष्टि करते हैं। माना जाता है कि देवताओं और असुरों द्वारा संयुक्त रूप से किए गए सागर मंथन में मथानी के रूप में इसी मंदार पर्वत का इस्तेमाल किया गया था। समुद्र मंथन के दौरान चौदह प्रकार के रत्न निकले थे। मंदार पर्वत सदियों से सनातनी हिंदुओं एवं जैन समाज के साथ-साथ मूल आदिवासी समुदाय के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक आध्यात्मिक केंद्र रहा है। वैसे तो यहां देश भर से सालोभर सैलानियों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन मकरसंक्रांति के अवसर पर प्रत्येक वर्ष करीब एक महीने तक लगने वाले भव्य मेले में बिहार के पड़ोसी राज्य झारखण्ड, उड़ीसा, बंगाल के साथ-साथ देश के अन्य क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का भीड़ उमड़ता है। रोपवे चालू हो जाने से जहां मंदार में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा वहीं इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इससे मंदार क्षेत्र के पर्यटन विकास के मार्ग में एक मील का पत्थर साबित होगा। मंदार पर्वत पर सनातन हिंदू, जैन संप्रदाय और सफा धर्म के मानने वाले श्रद्धालुओं की संगम स्थली है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी मंदार पर्वत से देवासुर संग्राम के वक्त समुंद्र का मंथन किया गया था। मंदार जैन संप्रदाय के लोगों का भी प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां भगवान वासुपूज्य का निर्वाण स्थल माना जाता है. यहां सैलानी पवित्र भगवान नरसिंह गुफा, सीता कुंड, शंख कुंड, काशी विश्वनाथ एवं पर्वत शिखर पर भगवान वासुपूज्य मंदिरों आदि में दर्शन पूजन करते हैं। मालूम हो कि करीब 750 फिट ऊंचे इस पर्वत के शिखर तक अबतक सैलानियों को सीढ़ियों के सहारे लगभग 1150 मीटर की दूरी काफी कठिनाइयों से घण्टों पैदल चलकर तय करनी पड़ती थी, लेकिन रोपवे के चालू होने से मंदार पर्वत पर विहार करना अब दुर्गम और कठिनाइयों भरा नहीं रहेगा। सैलानियों को अब निचले स्टेशन से पर्वत शिखर पर जाने में सिर्फ चार मिनट का समय लगेगा। रोपवे के चालू हो जाने से पर्वत के तलहटी में दक्षिण दिशा में स्थित पापहरणी सरोवर के समीप सफा मंदिर के निकट बने बेस कैंप से पर्वत के शिखर की दूरी करीब 710 फिट रह जाएगी, जिसका सफर अब 8 मिनटों में पूरा किया जा सकेगा। पर्वत के तलहटी में बने बेस कैम्प स्टेशन के बाद मध्य एवं पर्वत शिखर पर दो अन्य स्टेशन बनाए गए हैं। मालूम हो सैलानियों को परेशानियों से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से मंदार पर्वत पर रोपवे प्रोजेक्ट का शिलान्यास 2015 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी एवं बिहार सरकार के तत्कालीन पर्यटन मंत्री जावेद इक्वाल द्वारा किया गया था। लंबी अवधि के बाद नवंबर 2017 में निर्माण कार्य आरंभ हुआ था। अगर कार्य योजना ससमय पूरा हो जाता तो 2019 में ही पूर्वी बिहार के लोगों को रोपवे का आनंद मिलना शुरू हो जाता। रोपवे निर्माण कार्य केंद्रीय एजेंसी राइट्स कर रही थी। करीब 9.18 करोड़ की लागत से बने 377.36 मीटर लंबे रोपवे प्रोजेक्ट को राइट्स कंपनी की सहयोग कोलकाता की एक कंपनी रोपवे एंड रिसोर्ट कर रही थी। शुरुआती दौर में इसके निर्माण में बहुत ढीलशील रही और निर्माण कार्य में काफी विलम्ब हुई। हालांकि पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन के दबाव के बाद रोपवे निर्माण कार्य में तेजी आई। पर्यटन विभाग द्वारा फिलहाल पांच हजार टिकट मंगाए गए हैं। रोपवे में सफर करने वाले सैलानियों के लिए प्रति व्यक्ति 80 रुपए किराया भी तय कर लिया गया है। जिसमें एक तरफ से जाने एवं आने का किराया शामिल है. जबकि शिखर से पर्वत के मध्य भाग सीताकुंड तक जाने के लिए 40 रुपए का टिकट लेना होगा। शुरुआती दौर में सैलानियों को पर्वत पर भ्रमण करने की कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार अगले एक साल तक राइट्स कंपनी के द्वारा ही मंदार में रोपवे का परिचालन किया जाएगा। वर्तमान में यहां केवल 8 केविन संचालित होंगे। हालांकि, सैलानियों को देखते हुए आने वाले दिनों में केविन के बढ़ाए जाने की संभावना व्यक्त की गई है।

रिपोर्ट:केआर राव 

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