रजौन (बांका): जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत बांका जिला के रजौन प्रखंड अंतर्गत अंगीकृत ग्राम उपरामा में कृषि विज्ञान केंद्र बांका के निगरानी में आज स्ट्रॉबेलर मशीन का परीक्षण कराया गया। स्ट्रॉबेलर एक ऐसा यंत्र है, जो कंबाइन हार्वेस्टर से काटे गए फसल अवशेष को एकत्रित कर कंपैक्ट करते हुए बांध देता है। इसका उपयोग पशु चारा के रूप में, बायोचार बनाने के लिए, मशरूम उत्पादन में एवं नवीनतम तकनीक से कप प्लेट इत्यादि बनाने में भी किया जा रहा है। मौके पर उपलब्ध कृषि विज्ञान केंद्र बांका के पशु वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि खेत में फैले हुए पराली पर यूरिया का घोल का छिड़काव कर गट्ठर बनाकर रखने से इस की भंडारण क्षमता बढ़ जाएगी तथा पशुओं को अत्यधिक पौष्टिक आहार मिल पाएगा क्योंकि इसमें यूरिया उपचारित करने के बाद प्रोटीन की मात्रा में 3 गुना तक वृद्धि हो जाती है। वहीं मौके पर उपस्थित मृदा वैज्ञानिक संजय कुमार मंडल ने बताया कि इसका उपयोग बायोचार बनाने के रूप में भी किया जा सकता है और बायोचार का उत्पादन करने के बाद पुनः खेत में इसे देने से खेत में जीवांश कार्बन की मात्रा में वृद्धि होगी, जिससे खेत में फसल उत्पादन ज्यादा होगा और खेत की उर्वर क्षमता लगातार बनी रहेगी। इस अवसर पर उपरामा एवं अन्य गांव के दर्जनों किसान उपस्थित रहे तथा इस यंत्र की सराहना करते हुए लोगों ने इसे किसानों के लिए वरदान बताया।
रिपोर्ट: केआर राव