आगे बढ़ो

भारती की शान हो तुम 

गर्व हो अभिमान हो तुम 

गरल मुक्त जो धरा कर दे 

वो अमिट वरदान हो तुम 

सारगर्भित आत्म बल से 

काल के सिर पे चढ़ो 

आगे बढ़ो, आगे बढ़ो 

भानु सा है तेज तुझमे 

धैर्य है और ओज तुझमे 

गर्जनाओं से द्रवित कर 

सिंह सा उद्घोष तुझमे 

युद्ध भूमि की ज्वाला हो 

हरि-अर्जुन का संवाद पढ़ो 

आगे बढ़ो, आगे बढ़ो 

विकराल हो दर्प कुचल डालो 

रिपु पथ मे मिले मसल डालो 

फिर शक्ति हीन करो अरि को 

पातकों की छटा बदल डालो 

अपने साहस के बल तुम 

अविराम "नवल "इतिहास गढ़ो 

आगे बढ़ो, आगे बढ़ो ....

         


                 -:  नवल प्रसाद 
                   बेतिया, प -चम्पारण

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