राहुल कुमार की कलम से ✍️
कोरोना से मरने वालों की संख्या 2019 से अब तक 52 लाख है, जबकि depression से प्रति वर्ष 80 लाख लोग मरते हैं। फिर भी हम ऐसे गंभीर बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते, क्योंकि यह मानसिक बीमारियाँ हैं। शारीरिक बीमारियों से इंसान मर सकता है तो मानसिक बीमारियों से भी, आंकड़ा मानसिक बीमारियों से मरने वालों की ज्यादा है।
तो यह जरुरी है कि हमें मानसिक बीमारियों को भी गंभीरता से लेनी चाहिए। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 40% लोग depression से पीड़ित हैं। जून महीने में मैं खुद depression और Bipolar Disorder से पीड़ित था। ना मुझे कहीं जाने की इच्छा हो रही थी और ना ही किसी से बात करने की। कोई मुझसे बात करता था तो ऐसा लगता था जैसे वो मुझे परेशान कर रहा है। मैं चाहता हूँ इनसब गंभीर रोगों को काफ़ी गंभीरता से लिया जाए और आपके संपर्क में कोई इससे पीड़ित है, तो उसकी सहायता भी की जाए!
अमेरिका के इण्डियाना यूनिवर्सिटी में 15 साल के रिसर्च के बाद depression के test की खोज हुई है,जो अब तक दुनिया भर के वैज्ञानिक नहीं कर पाए थे। यह जाँच blood-test के माध्यम से होगा। इसे अमेरिका में मान्यता भी मिल गई है।
यह बहुत अच्छी ख़बर है, मानसिक रोगों की भी जाँच हो पाएगी और इलाज़ भी हो पाएगी।
Depression में Art of living द्वारा संचालित सुदर्शन क्रिया /Happiness Program भी काफ़ी फायदेमंद हैं, इससे आप depression से तो लड़ ही सकते हैं,साथ में आपके चेहरे की मुस्कान भी बनी रहेगी। मेरा मकसद आपको यह महत्वपूर्ण जानकारी देना था,प्रचार करना नहीं।
बेतिया में मनोरोगों के एक अच्छे चिकित्सक भी हैं DrChandan Srivastava
इसलिए जरुरी है कि आप मानसिक और शारीरिक दोनों रोगों को गंभीरता से लें, इसे पहचाने और इलाज़ भी लें!
Meditations भी काफ़ी फायदेमंद हैं इसके लिए।
शारीरिक रोगों की तरह ही गंभीर हैं मानसिक रोग
byAap Ki Awaj
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