रजौन (बांका): केंद्र सरकार द्वारा आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथिक को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष चिकित्सकों की नीति बनाई गई थी। जिसका रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हवा हवाई बनकर रह गई है। आयुष चिकित्सक डॉक्टर शाहनवाज आलम ने बताया केंद्र सरकार ने नीति बनाकर एलोपैथिक के साथ-साथ आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथिक को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक अस्पताल में पद सृजित करते हुए एक-एक आयुष चिकित्सक की नियुक्ति करने की बात कही गई थी।रजौन प्रखंड में आयुष चिकित्सक रहने के बाद भी इन आयुष चिकित्सकों से ओपीडी के अलावे रोस्टर के मुताबिक अन्य तरह की ड्यूटी करवाया जाता है। जबकि आयुष चिकित्सकों आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक की जगह एलोपैथिक दवाइयां लिखवाने के लिए मजबूर किया जाता है। इस कारण आयुष चिकित्सक केंद्र सरकार की टाय-टाय फिश नीति के चलते आइस चिकित्सक लाचार एवं हताशा है। आयुष चिकित्सक डॉक्टर शाहनवाज ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से इस नीति को धरातल पर लागू कराने की मांग की है।
रिपोर्ट:केआर राव