*उत्तर भारत में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। जबकि इस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण वट पूजन के पहले पीपल वृक्ष की पूजन परिकर्मा का भी विशेष महत्व है। महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए दोनों व्रत रखती हैं। इस दिन पीपल और वट वृक्ष की पूजा की जाएगी। शास्त्रों में वट सावित्री के व्रत का विशेष महत्व है।*
*सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं दोनों व्रत और इस दिन की जाती है पीपल और वट वृक्ष की पूजा इन्हीं में से एक सोमवती अमावस्या और वट सावित्री का व्रत है। शास्त्रों के अनुसार, वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है इस साल वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या सोमवार के दिन रखा जाएगा। इसी दिन सोमवती अमावस्या और शनि जयंती भी है।*
*वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजन सामग्री:*
*वट सावित्री व्रत में अमावस्या तिथि 29 मई को दिन में 2:15 से आरंभ होकर 30 मई को दिन में 3:39 तक रहेगा।*
*सोमवती अमावस्या एवं वट सावित्री पूजन सामग्री:*
*पल्लव, गोबर, गंगाजल, फूल, बेलपत्र, शमीपत्र, तुलसी पत्र, दुभ, चंदन, हल्दी, अबीर, सिंदूर, कपूर, रक्षासुत, पंचामृत, वस्त्र, जनेउ, कलश दिया ढकना, घी, बत्ती, धूप, नैवेद्य, फल, मिठाई, बांस का पंखा, अगरबत्ती, लाल व पीले रंग का कलावा, पांच प्रकार के फल, पीपल एवं बरगद का पेड़, चढ़ावे के लिए पकवान, हल्दी, अक्षत, सोलह श्रृंगार, वस्त्र एवं कलावा, तांबे के लोटे में पानी, पूजा के लिए साफ सिंदूर, लाल रंग का वस्त्र इत्यादि..*
*सोमवती अमावस्या एवं वट सावित्री पूजा विधि:*
- महिलाएं इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
- स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूरा श्रृंगार करें।
- इसके बाद बांस की टोकरी में पूजा का सारा सामान रखें. इस दिन पहले घर पर पूजा करें। पूजा करने के बाद सूर्यदेव को लाल फूल और तांबे के लोटे से अर्घ्य दें।
- इसके बाद घर के पास या छत पर पीपल एवं बरगद का पेड़ हो तो वहां जाएं या उसे एक दिन पहले गमले में लगा लें
- वृक्ष की जड़ पर जल चढ़ाएं.
- फिर देवी भगवान विष्णु शिव पार्वती और सावित्री को कपड़े और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष का साविध पूजन कर फल और फूल अर्पित करें। प्रार्थना पूर्वक 108 परिक्रमा करें।
- इसके बाद कुछ देर वट वृक्ष पर पंखे से हवा करें।
- और सोमवती अमावस्या एवं वट सावित्री की व्रत कथा सुनें।
*सोमवती अमावस्या का महत्व:*
*30 शाल बाद इस सोमवती अमावस्या पर शनि जयंती और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बना हुआ है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की पूजा करना लाभकारी रहेगा। शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिए खास माना जा रहा है। इस दिन शनिदेव की पूजा करना विशेष फलदायी मानी जाएगी।*
*शनि दोष से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ की पूजन, परिक्रमा कर सरसों का तेल का दीपक जलाएं।*
*और !! ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः!!* और *ॐ शं शनैश्चराय नमः।। मंत्र का 108 बार जप करें।*
*सोमवती अमावस्या के दिन अन्न और शनि से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए। इस दिन तेल से शनि अभिषेक अत्यंत ही लाभकारी होगा। अपनी श्रद्धा अनुसार चावल, उड़द दाल, काले वस्त्र, काले चने, नमक, काला तिल और सरसो तेल का दान कर सकते हैं। जिनके माता या पिता परलोक चले गए हैं, या जिनको पितृ दोष लगा है उन्हें सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान करते हुए जल में तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर तिल जल अर्पित करना चाहिए। या त्रिपिंडी विधान अत्यंत आवश्यक एवं लाभकारी होगा।अगर किसी की कुंडली में सर्प दोष पाया जाता है तो उनको अमावस्या तिथि के दिन पाठ करना चाहिए। वहीं जिनकी कुंडली में चंद्र कमजोर है तो वह सोमवती अमावस्या के दिन गाय को दही और चावल खिलाएं।इससे कुंडली में चंद्र दोष कम होता है।*
*सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है*
*अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। और कुछ अन्य परम्पराओं में भँवरी देने का भी विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।*
*सोमवती अमावस्या व्रत कथा:*
*एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। उस परिवार में पति-पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी। वह पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उस पुत्री में समय और बढ़ती उम्र के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था। वह लड़की सुंदर, संस्कारवान एवं गुणवान थी। किंतु गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। वो उस कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए। कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधु ने कहा कि इस कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है। तब ब्राह्मण दम्पति ने साधु से उपाय पूछा, कि कन्या ऐसा क्या करें कि उसके हाथ में विवाह योग बन जाए। साधु ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है।*
*यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है। साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है।*
*यह बात सुनकर ब्राह्मणी ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगल दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती।एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता। बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं?*
*तब कन्या ने साधु द्बारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा।*
*सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी।*
*उस दिन सोमवती अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो उठा।*
*इसीलिए सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के दिन भंवरी देता है, उसके सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है। अतः जो व्यक्ति हर अमावस्या को न कर सके, वह सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं कि भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।*
*ऐसी प्रचलित परंपरा है कि पहली सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिंदूर और सुपाड़ी की भंवरी दी जाती है। उसके बाद की सोमवती अमावस्या को अपने सामर्थ्य के हिसाब से फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने की सामग्री इत्यादि की भंवरी दी जाती है और फिर भंवरी पर चढाया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननंद या भांजे को दिया जा सकता है।*
*वट सावित्री व्रत का महत्व:*
वट सावित्री का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं का मुख्य पर्व है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्यवती रहने की कामना करती हैं। इस दिन सत्यवान-सावित्री की यमराज के साथ पूजा की जाती है। माना जाता है कि वट सावित्री की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। इसलिए सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं।
*वट सावित्री व्रत कथा- *
पौराणिक मान्यताओं के और आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के अनुसार मद्रदेश में अश्वपति नाम के धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। राजा ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया। जिसके कुछ समय बाद उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई। उसका नाम उन्होंने सावित्री रखा। विवाह योग्य होने पर सावित्री को वर खोजने के लिए कहा गया तो उसने द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पतिरूप में वरण किया। यह बात जब नारद जी को मालूम हुई तो वे राजा अश्वपति से बोले कि सत्यवान अल्पायु हैं। एक वर्ष बाद ही उनकी मृत्यु हो जाएगी। नारद जी की बात सुनकर उन्होंने पुत्री को समझाया,पर सावित्री सत्यवान को ही पति रूप में पाने के लिए अडिग रही।
सावित्री के दृढ़ रहने पर आखिर राजा अश्वपति ने सावित्री और सत्यवान का विवाह कर दिया। सावित्री सास-ससुर और पति की सेवा में लगी रही। नारद जी ने मृत्यु का जो दिन बताया था, उस दिन सावित्री भी सत्यवान के साथ वन को चली गई। वन में सत्यवान ज्योंहि पेड़ पर चढ़ने लगा, उसके सिर में असहनीय पीड़ा होने लगी। वह सावित्री की गोद में अपना सिर रखकर लेट गया। थोड़ी देर बाद सावित्री ने देखा कि अनेक दूतों के साथ हाथ में पाश लिए यमराज खड़े हैं। यमराज सत्यवान के अंगुप्रमाण जीव को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चल दिए।
सावित्री को आते देख यमराज ने कहा, ‘हे पतिपरायणे! जहां तक मनुष्य साथ दे सकता है, तुमने अपने पति का साथ दे दिया. अब तुम लौट जाओ.’ सावित्री ने कहा, ‘जहां तक मेरे पति जाएंगे, वहां तक मुझे जाना चाहिए. यही सनातन सत्य है.’
यमराज ने सावित्री की धर्मपरायण वाणी सुनकर वर मांगने को कहा। सावित्री ने कहा, ‘मेरे सास-ससुर अंधे हैं, उन्हें नेत्र-ज्योति दें.’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर उसे लौट जाने को कहा, किंतु सावित्री उसी प्रकार यम के पीछे चलती रही। यमराज ने उससे पुन: वर मांगने को कहा।
सावित्री ने वर मांगा, ‘मेरे ससुर का खोया हुआ राज्य उन्हें वापस मिल जाए.’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर उसे लौट जाने को कहा, परंतु सावित्री अडिग रही। सावित्री की पति भक्ति व निष्ठा देखकर यमराज पिघल गए। उन्होंने एक और वर मांगने के लिए कहा। तब सावित्री ने वर मांगा, ‘मैं सत्यवान के पुत्रों की मां बनना चाहती हूं. कृपा कर आप मुझे यह वरदान दें।
सावित्री की पति-भक्ति से प्रसन्न हो इस अंतिम वरदान को देते हुए यमराज ने सत्यवान को पाश से मुक्त कर दिया और अदृश्य हो गए। सावित्री अब उसी वट वृक्ष के पास आई। वट वृक्ष के नीचे पड़े सत्यवान के मृत शरीर में जीव का संचार हुआ और वह उठकर बैठ गया। सत्यवान के माता-पिता की आंखें ठीक हो गईं और खोया हुआ राज्य वापस मिल गया।
*अपने व्रत पूजन से आपके संपूर्ण मनोकामना पूर्णता और सर्व साफल्यता लिए श्री गणेश पार्वती के साथ महादेव एवं माता महालक्ष्मी और श्री हरि विष्णु से हमारी विशेष प्रार्थना, और आपके सुखी जीवन की हार्दिक शुभकामना...*
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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*🌹ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री🌹*
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(अहर्निशं सेवा महे)
*और आवश्यक मे कॉल से संपर्क के लिए:- 7004427683*
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