संग्रामपुर(मुंगेर ) से पंकज सिंह की रिपोर्ट
भारत सरकार के द्वारा स्वच्छ भारत मिशन तहत कई तरह के कार्यक्रम चलाए गए हैं जो कि आज धरातल पर नजर भी आ रही है वही ठीक दूसरी और बिहार सरकार के द्वारा कई तरह के महत्वकांक्षी योजनाएं भी बिहार में चल रही है जिसका जीता जागता सबूत भी जगह जगह पर कहीं कहीं दिखाई देता है परंतु मुंगेर जिले के संग्रामपुर प्रखंड के झिकुली पंचायत के अंतर्गत रतनपुरा गांव में आज तक लोगों को सड़क नसीब तक नसीब नहीं हुआ है वही बताते चलें कि आज से पिछले 30 वर्ष पूर्व ही रतनपुरा के सड़क में पत्थर बिछाने का काम किया गया था उसके बाद आज तक सरकार के द्वारा पत्थर तो दूर की बात है मिट्टी भरवाना भी उचित नहीं समझा गया वहीं ग्रामीणों के द्वारा यह कहा जाता है कि विधानसभा चुनाव में विधायक को हम लोग पूरी जोर-शोर से मेहनत करके अपना विधायक बनाने का काम करते हैं विधायक भी चुनाव के समय में हजारों हजार जनता से वादे करके जाते हैं पर जीतते ही सब कुछ भूल जाते हैं चुनाव जीता हुआ लगभग 5 से 7 महीने हो गए पर एक बार गांव घूमना भी उचित नहीं समझे तो वह काम क्या करेंगे वही पंचायत प्रतिनिधियों की अगर बात की जाए तो पंचायत प्रतिनिधि भी अपने चुनाव के समय में अनेकों वादे करते हैं पर निभाते कुछ नहीं है जनता के विश्वास के ऊपर खरे नहीं उतरते हैं वहीं अगर संग्रामपुर जिला परिषद की बात किया जाए तो वही उनके द्वारा यह वादा किया गया था कि चुनाव मैं मदद करें और इस बार चुनाव जीते ही 2 महीने के बाद हम इस सड़क को बनवा देंगे पर सड़क बनाना तो दूर की बात है चुनाव जीते ही वह गांव का नाम तक भी भूल गए हैं एक बार जनता से मिलना भी मुनासिब शायद नहीं समझे हैं अगर हम मुखिया की बात करें तो मुखिया जी का यह भी यही वादा था कि चुनाव जीते ही पहला काम अगर कोई होगा तो वह रतनपुरा का सड़क होगा पर अभी तक कुछ होते हुए दिखाई नहीं दे रहा है इससे स्पष्ट साबित होता है कि सरकार के सात निश्चय योजना हर घर नली गली हर सड़क पक्की करण उसका सपना अधूरा रहता हुआ दिखाई दे रहा है अब देखने वाली बात यह होगी कि पंचायत प्रतिनिधि या फिर विधायक किनके द्वारा यह सड़क का निर्माण किया जाता है यह सड़क का स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि अभी तो बरसात का मौसम आया भी नहीं है पर 1 से 2 दिन बारिश होते ही सड़क में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है वही इस गांव की आबादी की बात अगर की जाए तो इस गांव की आबादी लगभग 2 हजारे के आसपास है यहां के लोग अपने रोजमर्रा के सामान लाने के लिए संग्रामपुर बाजार जाते हैं अब देखने वाली बात यह होगी कि इस वर्ष भी रतनपुरा झिकुली श्रीपुर इत्यादि का लोग घुटने भर से अधिक कीचड़ में चलने पर मजबूर होंगे। वहीं ग्रामीणों का कहना है किस प्रकार का रोड हमारे पंचायत हमारे गांव में छोड़कर शायद ही कहीं पर होगा, अगर प्रतिनिधि यहां पर धान एवं गेहूं की खेती करेंगे तो एक बीघा खेत के माफिक अनाज हो सकता है।