बांका: चांदन प्रखंड मुख्यालय से सिर्फ एक किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन के बगल स्थित गौरीपुर पंचायत का मानिकपुर गांव की समस्या कम होने की बजाय लगातार
बढ़ती जा रहा है।औऱ इसी समस्या के कारण इस गांव के अधिकतर परिवार प्रखंड मुख्यालय या देवघर में भाड़े के मकान में रह रहे है। इस गांव में ब्राह्मण, लोहार,यादव, पंडित,रमानी सहित अन्य परिवार रहते है। जिसकी कुल संख्या 800 के करीब है।रेलवे स्टेशन बनने के बाद स्टेशन पर आने का रास्ता तो बन गया लेकिन वहां से गांव की दूरी आधा किलो मीटर से भी कम है। इस आधे किलोमीटर में गांव का सारा दर्द समाया हुआ है। हल्की बारिश होते ही रेलवे ओभर ब्रिज के नीचे पानी जमा हो जाता है।जिससे होकर मानिकपुर, परसिया, हड़खार ,इत्यादि गांव के ग्रामीण को हाथ मे चप्पल लेकर पार होना पड़ता है। इस गांव में आज तक किसी सरकारी योजना का कोई लाभ मिल सका है।न कोई स्कूल है।और न ही कोई आंगनबाड़ी केंद्र जिससे इस गांव के बच्चे को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के लिए दो से तीन किलोमीटर तक जाना पड़ता है। पंचायत स्तर से भी इस गांव को सदा उपेक्षित रखा गया है। हाल के दिनों में इस गांव में एक नलजल योजना लगाया गया पर दो साल में एक सप्ताह भी गांव वालों को पानी नही मिल सका है। जबकि दो माह से सिर्फ एक स्विच खराब होने के कारण बंद पड़ा है। स्थानीय ग्रामीण सोनेलाल तिवारी,विजय तिवारी विनोद सिंह रामु रमानी मनोज तिवारी,इत्यादि का कहना है कि इस गांव को कोई सुविधा नही मिल सकी है। इसकी उपेक्षा से यहां के लोग का अब पलायन होता जा रहा है।जबकि बीडीओ राकेश कुमार ने बताया कि नलजल योजना को मैने खुद जाकर देखा है। औऱ एक सप्ताह के अंदर उसे चालू करवा दिया जाएगा। साथ ही स्कूल और आंगनबाड़ी के लिए भी अलग व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।