माता पिता को कंधे पर लेकर गंगाधाम से बाबाधाम ले जाने वाले चन्दन कुमार की चर्चा जोरों पर है।

बांका: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2022 की धूम अब धीरे धीरे कांवरिया पथ पर देखने लगा है।ऐसे में इस बार एक अनोखा दृश्य भी देखने को मिला। जहां मंगलवार को बांका जिले की सीमा में प्रवेश करते ही 
श्रवण कुमार देखने को मिले। जहानाबाद जिला के घोषी थाना अंतर्गत केवाली विरपुर गांव निवासी 40 वर्षीय साधु बम श्रवण कुमार के नाम से मशहूर हुए चंदन कुमार अपने माता-पिता को कांवर में बिठाकर, धांधी बेलारी कच्ची कांवरिया के रास्ते पत्नी व बच्चों के साथ गंगाधाम से जल लेकर झारखंड के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग  पर जलाभिषेक करने पांव-पैदल बाबाधाम रवाना हुए।

कांवर रुपी बहंगी पर चंदन कुमार ने आगे 70 वर्षीय पिता जगन्नाथ साव केसरी और पीछे 65 वर्षीय माता मीना देवी को बिठाकर 35 वर्षीय पत्नी रानी देवी के सहयोग से, अपने छोटे-छोटे पुत्र कुंदन व पुत्री तन्नु, शिवानी के साथ पांव-पैदल बोल बम की जयघोष करते मार्ग में निरंतर आगे बढ़े चले जा रहे हैं।साधु बम ने बताया कि सात भाई-बहन में हम सबसे छोटे हैं। आठ वर्षो से लगातार प्रत्येक पूर्णिमा को सत्यनारायण भगवान की पूजा करते चले आ रहे है। बीच-बीच में बाबाधाम बैजनाथ धाम और बराबर पहाड़ पर भी जाकर सत्यनारायण भगवान की पूजा-पाठ किए है। इस पूर्णिमा को सत्यनारायण पूजा के बाद आरती के दौरान मन में लालसा हुई कि माता-पिता को कांवर में बिठाकर बाबाधाम जाए। इसमें पत्नी बच्चों ने भी साथ दिया। और रविवार सुबह 5:00 बजे जल संकल्प कराकर माता-पिता को कांवर रुपी बहंगी में बिठाकर पति-पत्नी कांधे पर उठाए बच्चों के साथ बाबा के दरबार जा रहे हैं।चंदन कहते हैं, 'हम पति-पत्नी और मेरे माता-पिता निरक्षर हैं। हम कबाड़ी का काम करते है। मेरा पुत्र तीसरी कक्षा और पुत्री छठी व तीसरी कक्षा में पढ़ती है। महादेव के प्रति हमारी असीम श्रद्धा है और हम भगवान को प्राथमिकता देते हैं। उन्हीं के हाथों में हमारे जीवन की पतवार है। ' 

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