इंद्रदेव को मनाने के लिए कहीं

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट 


शंभुगंज ,(बांका):सावन मास में मौसम की बेरूखी से किसानों के साथ आमलोगों की परेशानी बढ़ गई है । बर्षा के बगैर चारो तरफ हाहाकार मच गया है । आलम तो यह है कि कृषि प्रधान क्षेत्रों में अब किसानों को खेती की चिंता सताने लग गई है । किसान सूख रहे धान बिचड़े को बचाने की कोशिश में है तो कई जगहों पर तो पीने का पानी भी नसीब नहीं हो रहा है । प्रखंड में 9859 हेक्टेयर में धान रोपाई का लक्ष्य निर्धारित है । मौसम की मार के कारण अब धान रोपनी का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है । किसान हताश और निराश हो रहे हैं । खासकर लघु किसान अब दिन - रात जीविका को लेकर चिंता में है । कई गांवों में किसान कुपित इंद्रदेव को रिझाने में जूट गए हैं । क्षेत्रवासी देवी - देवताओं को मनाने के लिए कहीं अष्टयाम तो कहीं हवन का आयोजन कर रहे हैं । इस क्रम में कुर्मा पंचायत में 24 घंटे का अखंड रामधुन कर रहे हैं तो मिर्जापुर में हवन का आयोजन हो रहा है । ताकि इंद्रदेव प्रसन्न होकर बर्षा से नदी , केनाल को भरकर किसानों को तृप्त कर दे ।चार दशकों से देखने को नहीं मिला यह दृश्य - स्थानीय 88 वर्षीय बुजुर्ग सुरेश प्रसाद सिंह , 65 वर्षीय विभूति प्रसाद सिंह , राजाराम सिंह सहित अन्य बुजुर्ग किसानों ने बताया कि सावन मास में बर्षा का अभाव पिछले चार दशकों से देखने को नहीं मिला । बताया कि इस मौसम में बदुआ , लोहागढ़ , गंगटी सहित अन्य नदियां उफान पर रहती थी । हरेक नहर - केनाल पानी से भरा रहता था । किसानों का धान रोपाई का काम मध्य में रहता था । इस वर्ष पानी के लिए हाहाकार है । कई गांव में जल स्तर नीचे जाने से पीने का पानी भी नसीब नहीं हो रहा है । पर्यावरण विशेषज्ञ प्रवीण कुमार प्रणव ने बताया कि प्रकृति के विमुख होने का मुख्य कारण है कि बढ़ते प्रदुषण और पर्यावरण का संरक्षण नहीं होना । बताया कि यदि मानव जीवन को सफल और सुखमय बनानी हो तो प्रकृति से जुड़ना होगा ।

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