अनेकता में एकता का प्रतिरूप है कांवरिया मेला

बांका: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का तीसरा सोमवारी आने वाला है। इस कारण पूरा  कांवरिया पथ केशरियामय हो गया। सिर्फ बोलबम के जयकारे के साथ पूरा पथ केशरिया रंग में रंग में रंग गया है। 
 बांका: श्रावणी मेला इस समय अपने पूरे परवान पर आ गया है। मेले की भव्यता में जैसे चार चांद लग गया हो। वही प्रशासनिक तैयारी और साफ-सफाई भी बांका जिले में सबसे बेहतर देखी जा रही है। जिसमें जिलाधिकारी सहित स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों  की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी आने वाली है इस बाबत संपूर्ण कांवरिया पथ पर कांवरिया की भीड़ देखते ही बनती है। बिहार के गंगाधाम से झारखंड के बाबाधाम तक संपूर्ण कांवरिया पथ बोल बम के जयकारे के साथ  केसरिया परिधानों के कारण सारा कांवरिया पथ केसरिया समुद्र में तब्दील हो गया है। इस वर्ष भी प्रत्येक वर्ष की तरह कई तरह के कांवरिया संपूर्ण रास्ते में अपने जलवे बिखेर रहे हैं। कुछ कांवरिया सिर्फ बेलपत्र खाकर अपनी यात्रा कर रहे हैं। तो कोई सिर्फ अरवा चावल खाकर बाबा धाम की ओर चल रहे हैं। जबकि कई कांवरिया ऐसे भी हैं जो उपवास कर कुछ  फलाहार कर बाबा की ओर बढ़ते जा रहे हैं। कई बम ऐसे भी हैं जो इस रास्ते पर सिर्फ बाबा का प्रसाद भांग और गांजा का सेवन कर ही भोलेनाथ को जल चढ़ाते हैं। सीतामढ़ी के नरेश बम और मधुबनी के राजू बम सिर्फ बेलपत्र खाकर ही जल चढ़ाने का प्रण लिए हुए हैं। उन्हें एक पुत्र की इच्छा है। नेपाल के आए राजू बम और सुमंती बम फलाहारी जल लेकर जा रहे हैं उसने बताया कि उन्हें बाबा की कृपा से नौकरी मिली है। इसलिए उसी वर्ष से लगातार बाबा भोलेनाथ को जल अर्पण कर रहे हैं। मिथिला के हरेंद्र बम का विश्वास है कि बाबा की कृपा से उनकी पत्नी की गंभीर बीमारी से ग्रसित जल्दी ही ठीक हो जाएगी और उसे भी बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए आना पड़ेगा। उसी के जल्दी स्वस्थ्य होने के लिए हलवा खा कर जलाभिषेक कर रहे हैं। इसी प्रकार इस रास्ते पर कई रूपों में भी कांवरिया आते हैं जिसमें डाक बम, पैदल बम, दांडी बम, और खड़ेसरी बम भी हैं। डाकबम 24 घंटे के अंदर यात्रा पूरी करते हैं जबकि पैदल बम की कोई सीमा नहीं होती। वहीं खड़ेसरी बम देवघर पहुंचने तक कहीं भी बैठते नहीं हैं। दांडी बम अपने शरीर को जमीन पर लेट कर यात्रा पूरी करते हैं। जिसे कम से कम एक माह का समय लगता है। इस प्रकार बोल बम के इस रास्ते में सभी बम एक समान बिना किसी भेदभाव के इस यात्रा पर चलते हैं। जिसकी कोई ना कोई मनोकामना  होती है या उनकी मनोकामना पूर्ण हो चुकी होती हैं। पंडित उमाशंकर पांडे बताते हैं कि सावन में जल अर्पण करने वाले की हर मनोकामना बाबा भोलेनाथ जरूरी पूरा करते हैं ।तभी इस यात्रा में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है।

Post a Comment

आप सभी हमें अपना कॉमेंट / संदेश भेज सकते हैं...

Previous Post Next Post