धान की जगह वैकल्पिक खेती में किसान

दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट

 शंभुगंज (बांका) : सावन माह बीत जाने के बाद अब भादो मास भी किसानों को रुलाने लगी है ।धान रोपाई का समय अब अंतिम हो रहा है , लेकिन बर्षा का कोई ठिकाना नहीं है। अब तो प्रखंड के अधिकांश किसानों ने धान रोपाई का उम्मीद ही छोड़ दिया है।किसान वैकल्पिक खेती कुलथी , कलाय , सरसों , अरहर इत्यादि अन्य फसल लगाने का जुगाड़  लगा रहे हैं । प्रखंड कृषि कार्यालय के अनुसार प्रखंड क्षेत्र में अभी तक मात्र 17 प्रतिशत ही धान रोपाई का काम हुआ।जिसमें सबसे अधिक परमानंदपुर पंचायत में 42 , पौकरी में 41 प्रतिशत धान रोपाई हुई।सबसे कम रोपाई कुर्मा , रामचुआ में छह , करसोप , बेलारी पंचायत में आठ प्रतिशत रोपनी हुई है। इसके अलावे बांकि बचे अन्य पंचायतों में भी 10 प्रतिशत से अधिक खेती नहीं हो सकी है।क्षेत्र के कई किसानों ने बताया कि धान रोपाई के लिए सबसे अंतिम सिंह नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र के भी एक सप्ताह बीत गए ।अब यदि इंद्रदेव बरसते भी हैं तो सभी किसानों के लिए धान रोपाई का काम संभव नहीं है। किसान रामजी यादव , राजाराम सिंह , अजय यादव , सोनेलाल , महेंद्र मंडल, राजेश सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि बर्षा नहीं होने के कारण अधिकांश बिचड़ा जलकर बर्बाद हो गया। दुसरी तरफ कम समय में धान उत्पादन के लिए हाइब्रीड बीज का बिचड़ा लगाए , लेकिन रोपाई का काम नहीं होने से बीचड़ा में ही धान फूटने लगा। बताया कि अब धान खेती में मेहनत और खर्च करने से अच्छा है कि सरकार क्षतिपूर्ति का लाभ देने के साथ कुलथी , सरसों इत्यादि फसल निःशुल्क मुहैया कराए। इस संबंध में बीएओ चितरंजन चौधरी ने बताया कि धान रोपाई का लक्ष्य बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक करने का काम हो रहा है। बताया कि अब शत - प्रतिशत धान का अक्षादन होना संभव नहीं है।

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