दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज (बांका) : सरकार के हर खेतों तक पानी पहुंचाने के दावे की पोल प्रखंड में खुलते नजर आ रही है । खासकर अंग्रेजों के जमाने का बना गुडबोल बांध जो सिंचाई का मुख्य साधन है , जो प्रशासनिक उदासीनता के शिकार हैं । जहां अव्यवस्था से दुखी गुलनी कुशाहा के किसानों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान कर डांड की खोदाई का काम शुरू कर दिया है। ताकि बेकार हो रहे बदुआ नदी का पानी खेतों तक पहुंच सके , और समय रहते धान की खेती हो सके किसान राजेश सिंह , त्रिभुवन सिंह , सदन सिंह , पंकज सिंह , चंदन शर्मा , सोनू शर्मा सहित अन्य किसानों ने बताया गुडबोल बांध लाइफ लाइन से कम नहीं है। करीब दो दशक पहले इस बांध से गुलनी कुशाहा , नरसंडी , खजूरी , रामचुआ इत्यादि अन्य गांव का हजारों एकड़ रकवा सिंचित होता था । क्षणिक स्वार्थ के चलते बालू तस्करों द्वारा बदुआ नदी से बालू उत्खनन कर तस्करी का काम किया । बांकि का काम सरकारी लीज ने कर दिया । जिसका परिणाम हुआ कि खेतिहर भूमि से नदी तल काफी गहरा हो गया । जिससे बांध का अस्तित्व मिटते चला गया । बताया कि इस बांध की मरम्मत के लिए कई बार विभाग से लेकर स्थानीय सांसद और विधायक को भी कहा , लेकिन इस ओर कोई दिलचस्पी नहीं लिया। बताया कि क्षेत्र की मुख्य खेती धान है ।जो सालोभर जीविका का मुख्य साधन है । यदि खेती नहीं होती है तो किसानों के सामने भूखमरी की समस्या होगी ।यह सोच प्रत्येक साल सभी किसान आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और गुडबोल बांध की मरम्मत करते हैं । ऐसे में प्रतिवर्ष किसानों के लाखों रुपए की बर्बादी भी होती हैं । स्थानीय विधायक सह ग्रामीण कार्य मंत्री जयंत राज एवं नवनिर्वाचित एमएलसी विजय कुमार सिंह से गुडबोल बांध कायाकल्प होने की उम्मीद जगी , लेकिन इस वर्ष भी निराशा हाथ लगी । यदि इस बांध की मरम्मत हो जाए तो क्षेत्र के किसानों की खुशहाली फिर से लौट जाए । इस संबंध में एमएलसी विजय कुमार सिंह ने बताया कि मानसून की बेरूखी के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है । बताया कि गुडबाल बांध क्षेत्र के किसानों के लिए किसी धरोहर से कम नहीं है। इसे पुनर्जीवित किया जाए इसके लिए प्रयासरत हैं ।