दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
संवाद सूत्र , शंभुगंज ( बांका ) : शनिवार को भादो पूर्णिमा है।अगले दिन से आश्विन मास शुरू हो जाएगा। मौसम की बेरूखी से प्रखंड में धान रोपनी मात्र 30 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गई ।अब तो किसानों का धान रोपनी से मोह भंग हो गया। खेतों में लगा धान बिचड़ा सिर्फ पशुओं के लिए चारा बन गया है। काफी मेहनत और पूजी लगाकर खेतों में लगे बिचड़े की इस तरह बर्बाद होता देख किसान हताश और निराश हैं। इस संदर्भ में चंपारण नीति की टीम ने किसानों से बातचीत किया तो किसान फफक पड़े। कुर्मा के किसान राजाराम सिंह ने बताया कि धान का फसल जीविका का मुख्य साधन है।हर वर्ष की तरह इस बार भी मेहनत और पूजी लगाकर धान बीचड़ा तैयार किए , लेकिन मौसम की बेवफाई और पटवन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से सभी खेत परती रह गया। अब तो सालोभर भोजन की चिंता हो रही है ।किसान सुरेश प्रसाद सिह ने बताया कि शुरूआती मौसम देख इस बार धान की बंपर खेती होने की उम्मीद लेकर धान बिचड़ा लगाए , ताकि अच्छी पैदावार से अधूरे मकान का निर्माण कर सकें। अचानक मौसम की करवट से सभी अरमानों पर पानी फिर गया ।यह स्थिति सिर्फ राजाराम और सुरेश प्रसाद के साथ नहीं , बल्कि सभी 19 पंचायतों में सैकड़ों किसानों की है ।कितने किसानों ने धान की खेती से बेटी की शादी और पुत्र की पढ़ाई का सपना पाल रखे थे , जो अब धाराशायी हो गया ।किसानों के दर्द को सरकार भी अनसूना कर रही है। किसानों ने बताया कि कुलथी , तोरी , रैचा देने से धान फसल की भरभाई कभी संभव नहीं है।सरकार को चाहिए कि किसानों को सम्मानजनक लाभ दें , ताकि क्षतिपूर्ति की भरभाई हो सके। इस संबंध में बीएओ चितरंजन प्रसाद ने बताया कि पंचायतवार सर्वे कर खेती -किसानी की सूचि तैयार कर रिपोर्ट जिला भेजी जाएगी।
