पंकज सिंह की रिपोर्ट
संग्रामपुर (मुंगेर)जहां एक तरफ बिहार सरकार आंगनबाड़ी को लेकर लाखों-करोड़ों रूपये खर्च कर रहे हैं, जिससे कि छोटे छोटे छोटे बच्चों को घर जैसी शिक्षा एवं खाना-पीना मिलता रहे, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर यह पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। इसका एक जीता जागता उदाहरण देखने को मिला संग्रामपुर प्रखंड के ददरी जाला गांव में, जहां पर आंगनबाड़ी की स्थिति बहुत ही बुरा है। बता दें कि आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 87 आंगनवाड़ी भवन के बदले एक सरकारी भवन में चलाया जा रहा है, जिसकी स्थिति बहुत ही जर्जर हो चुकी है एवं उस भवन में बच्चों के साथ साथ गाय भैंसों के लिए चारा भी रखा जाता है। भवन में कुल 2 रूम और एक बरामदा है, एक रूम और बरामदे पर पशुओं के लिए चारा रखा गया है। एवं साफ सफाई भी कहीं नजर नहीं आ रही है। वह आंगनवाड़ी एक तबेले में तब्दील हो चुका है। वहीआंगनबाड़ी शिक्षिका ने बताया कि आंगनबाड़ी के लिए भवन बनाया गया है बगल में लेकिन उसमें खिड़की और दरवाजा नहीं रहने के कारण आसपास के लोग उसमें भूसा और पुआल भर कर रखे हुए हैं। हमारे तरफ से मुखिया को भी इसके लिए बोला गया था, तभी उस समय इस पंचायत के मुखिया बमबम पासवान थे, उनका कहना था कि हमारे पास पैसे नहीं है दरवाजा और खिड़की लगाने का जब पैसा आएगा तब लगवा दिया जाएगा। आज वह भवन 7- 8 साल से वैसा ही पड़ा है, मजबूरी में हमें यहां पर आंगनबाड़ी चलाना पड़ रहा है।अब देखते हैं की आंगनबाड़ी संबंधित पदाधिकारी इस पर किसी भी प्रकार का जायजा लेते हैं या फिर हमेशा की तरह मौन रहेंगे।
